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06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 01 || जरासंध का विशाल सेना के साथ मथुरा पर आक्रमण

06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 01 || जरासंध का विशाल सेना के साथ मथुरा पर आक्रमण; श्री कृष्‍ण और बलराम द्वारा उसकी सेना का संहार; मगधराज की पराजय तथा श्रीकृष्‍ण–बलराम का मथुरा में विजयी होकर लौटना 'वसुदेव के पुत्र और देवकीनन्‍दन होने के साथ ही नन्‍दगोप के भी कुमार हैं, उन सच्चिदानन्‍दस्‍वरूप गोविन्‍द को बारंबार नमस्‍कार है।' बहुलाश्‍व ने पूछा: - मैंने आपके मुख से अद्भुत मथुरा खण्‍ड की कथा सुनी, अब मुझे श्रीकृष्‍ण चरितामृत से पूर्ण द्वारका खण्‍ड सुनाइये।  श्रीराम वल्‍लभ श्रीकृष्‍ण के कितने विवाह, कितने पुत्र और कितने पौत्र हुए?  महामते, उनके मथुरा को छोड़कर द्वारका में निवास करने का क्‍या कारण, ये सब बातें बताइये। श्रीनारदजी ने कहा:- महाबली कंस के मर जाने पर उसकी दो रानियां- अस्ति और प्राप्ति बड़े दु:ख से जरासंध के घर गयीं।  उनके मुख से कंस के मरण का वृतान्‍त सुनकर जरापुत्र महाबली जरासंध अत्‍यन्‍त कुपित हो इस भूतल को यदुवंशियों से शून्‍य कर देने के लिये उद्यत हो गया।  राजन् ! उस बलवान नरेश ने तेईस अक्षौहिणी सेना लेकर मथुरा पव धावा बोल दिया।  महासागर के समान गर्जन...