Posts

Showing posts with the label 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 18 || यमुना जी के जप व पूजन के लिये पटल व पद्धति

04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 18 || यमुना जी के जप और पूजन के लिये पटल और पद्धति का वर्णन

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 18 || यमुना जी के जप और पूजन के लिये पटल और पद्धति का वर्णन मांधाता बोले:- मुनिश्रेष्ठ, यमुनाजी के कामपूरक पवित्र पटल तथा पद्धति का जैसा स्‍वरूप है, वह मुझे बताइये, क्‍योंकि आप साक्षात ज्ञान की निधि हैं। सौभरि ने कहा:- महामते, अब मैं यमुनाजी के पटल तथा पद्धति का भी वर्णन करता हूँ जिसका अनुष्‍ठान, श्रवण अथवा जप करके मनुष्‍य जीवन्‍मुक्‍त हो जाताऊ है।  पहले प्रणव (ऊँ) का उच्‍चारण करके फिर मायाबीज (ह्रीं) का उच्‍चारण करे, तत्‍पश्‍चात लक्ष्‍मीबीज (श्रीं) को रखकर उसके बाद कामबीज (क्‍लीं) का विधिवत प्रयोग करे। इसके अनन्‍तर ‘कालि‍न्‍दी‘ शब्‍द का चतुर्थ्‍यन्‍त (कालिन्‍द्यै) रखे, फिर ‘देवी’ शब्‍द के चतुर्थ्‍यन्‍तरूप (देव्‍यै) का प्रयोग करके अन्‍त में ‘नम:’ पद जोड़ दे।  (इस प्रकार ‘ऊँ हीं श्रीं, क्‍लीं कालिन्द्यै देव्‍यै नम:’ या मन्‍त्र बनेगा) इस मंत्र का मनुष्‍य विधिवत जप करे।  इस ग्‍यारह अक्षर वाले मंत्र का ग्‍यारह लाख जप करने से इस पृथ्‍वी पर सिद्धि प्राप्‍त हो सकती है, मनुष्‍यों द्वारा जिन-जिन काम्‍य पदार्थों के लिये प्रार्थना की जात...