06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 22 || सुदामा ब्राह्मण का उपाख्यान
06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 22 || सुदामा ब्राह्मण का उपाख्यान श्रीनारदजी कहते हैं- सुदामा नामक श्रीकृष्ण के एक ब्राह्मण सखा थे। वे अपनी पत्नी सत्या के साथ अपने नगर में रहने थे। सुदामा वेद-वेदांग के पारंगत थे, परंतु धनहीन थे और थे वैराग्यवान। वे अपनी अनकूल पत्नी के साथ अयाचित वृति के द्वारा जीवन-निर्वाह करते। सुदामा ने एक दिन दरिद्रता से उत्पीड़ित दु:खिनी अपनी पत्नी से कहा- ‘पतिव्रते ! द्वारकाधीश श्रीकृष्ण मेरे मित्र हैं, सांदीपनि गुरु के घर में मैंने उनके साथ विद्याध्ययन किया है; परंतु श्रीकृष्ण के भोज, वृष्णि और अन्धकों के अधीश्वर होने के बाद मेरा उनसे मिलना नहीं हुआ। वे त्रिलोकी के नाथ भगवान दु:खहारी और दीनवत्सल है। पति के वचन सुनकर पतिव्रता सत्या ने, जिसका कण्ठ सूख रहा था, जो फटे-पुराने कपडे़ पहने हुए थी, भूख से अत्यन्त पीड़ित थी, पतिदेव से कहा- ‘ब्रह्मान’ जब साक्षात श्रीहरि आपके सखा हैं, तब हम लोग फटे चिथडे़ पहने और भूखे क्यों रहें ? लोग द्वारका जाकर साक्षात कमलापति के दर्शन करते हैं और धनवान होकर घर लौटते; अतएव आप भी वहाँ जाइये। सुदामा ने कहा- मै...