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10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 06 || श्रीकृष्‍ण के अनेक चरि‍त्रों का संक्षेप से वर्णन

10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 06 || श्रीकृष्‍ण के अनेक चरि‍त्रों का संक्षेप से वर्णन श्रीगर्गजी कहते हैं- राजन ! अब मैं पुन: तुम्‍हारे समक्ष श्रीहरि‍ के यश का संक्षेप से वर्णन करूँगा। एक समय भगवान श्रीकृष्‍ण ने रूक्‍मि‍णी के साथ अद्भुत हास्‍य वि‍नोद कि‍या था। अनि‍रूद्ध के विवाह में उन्‍होंने अपने भाई बलरामजी के द्वारा रुक्‍मि‍णी के भाई रुक्‍मी का वध करा दि‍या। बाणासुर की पुत्री ऊषा ने एक स्‍वपन देखा और उसकी चर्चा अपनी सखी चि‍त्रलेखा से की। चि‍त्रलेखा ने श्रीहरि‍ के पौत्र अनि‍रूद्ध का अपहरण कर लि‍या। कन्‍या के अन्‍त:पुर मे पाये जाने के कारण बाणसुर ने उन्‍हें कारागार में डाल दि‍या। फि‍र तो बाणासुर के साथ यादवों का घोर युद्ध हुआ। साक्षात भगवान श्रीकृष्‍ण तथा शंकरजी में युद्ध छि‍ड़ गया। उस समय माहेश्‍वर-ज्‍वर और वैष्‍णव-ज्‍वर भी आपस में लड़ गये। पराजि‍त हुए माहेश्‍वर-ज्‍वर ने भगवान श्रीकृष्‍ण की स्‍तुति‍ की। भगवान श्रीकृष्‍ण के द्वारा तजब बाणासुर की भुजाओं का छेदन होने लगा, तब उस असुर की जीवनरक्षा के लि‍ए रुद्रदेव ने भगवान का स्‍तवन कि‍या। अनिरूद्ध को ऊषा की प्राप्‍ति‍ हुई। यादव बालकों के स...