10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 59B || गर्गाचार्य के द्वारा राजा उग्रसेन के प्रति भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन (251 से 500 तक)
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 59B || गर्गाचार्य के द्वारा राजा उग्रसेन के प्रति भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन (251 से 500 तक) २५१. सुकेशो व्रजेश: सुन्दर केशवाले व्रजमण्डलके स्वामी, २५२. सखा सख्य-रतिके आलम्बन, २५३. वल्लभेशः प्राणवल्लभा श्रीराधाके हृदयेश, २५४. सुदेश :- सर्वोत्कृष्ट देशस्वरूप ॥ ४२ ॥ २५५. कणत्किङ्किणीजालभृत् → झनकारती किङ्किणीकी लड़ों को धारण करनेवाले, २५६. नूपुराढ्यः = चरणोंमें नूपुरोंकी शोभासे सम्पन्न, २५७. लसत्कङ्कणः - कलाइयोंमें सुन्दर कंगन धारण करनेवाले, २५८. अङ्गदी- बाजूबंदधारी, २५९. हारभार:- हारोंके भारसे विभूषित, २६०. किरीटी=मुकुटधारी, २६१. चलत्कुण्डलः कानोंमें हिलते हुए कुण्डलोंसे सुशोभित, २६२. अङ्गुलीयस्फुरत्कौस्तुभः-हाथोंमें अंगूठीके साथ वक्षःस्थलपर जगमगाती हुई कौस्तुभमणि धारण करनेवाले, २६३. मालतीमण्डिताङ्गः = मालतीकी मालासे अलंकृत शरीरवाले ॥ ४३ ॥ २६४. महानृत्यकृत्-महारास नृत्य करनेवाले,...