04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 19 || श्री यमुना-सहस्‍त्रनाम महात्मय

श्री गर्ग संहिता
04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 19 || श्री यमुना-सहस्‍त्रनाम महात्मय

मांधाता बोले:- मुनिश्रेष्ठ, यमुनाजी का सहस्‍त्र नाम समस्‍त सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला उत्तम साधन है, आप मुझे उसका उपदेश कीजिये, क्‍योंकि आप सर्वज्ञ और निरामय (रोग-शोक से रहित) हैं।

सौभरि ने कहा:- मांधाता नरेश, मै तुमसे ’कालिन्दी सहस्त्रनाम’ का वर्णन करता हूँ, वह समस्त सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला दिव्‍य तथा श्रीकृष्‍ण को वशीभूत करने वाला है।

विनियोगः ॥

अस्य श्रीकालिन्दीसहस्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य सौभरिरृषिः । श्रीयमुना देवता । अनुष्टुप् छन्दः । मायाबीजमिति कीलकम् । रमाबीजमिति शक्तिः । श्री कालिन्दनन्दिनीप्रसादसिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः ।

उक्‍त वाक्‍य पढकर सहस्‍त्रनाम-पाठ के लिये विनियोग का जल छोडे़ :-

ध्‍यान:-
श्‍यामामम्‍भोजनेत्रां सघनघनरुचिं रत्‍नमञ्जीरकूजत्।
कांचीकेयूरयुक्तां कनकमणिमये बिभ्रतिं कुण्‍डले द्वे॥

भ्राजच्‍छरीनीलवस्‍त्र स्‍फुरदिभजचलद्धाभारां मनोज्ञां।
ध्‍याये मार्तण्‍डपुत्रीं तनुकिरणचयोद्दीप्‍तदीपाभिरामाम्॥

जो श्यामा (श्‍यामावर्ण एवं षोडश वर्ष की अवस्था वाली) है, जिनके नेत्र प्रफुल्ल कमल-दल की शोभा को छीने लेते हैं, घनीभूत मेघ के समान जिनकी नील कान्ति है।

जो रत्‍नों द्वारा निर्मित बजते हुए नूपुर और झनकारिता हुई करधनी एवं केयुर आदि आभूषणों से युक्त है तथा कानों में सुवर्ण एवं मणि निर्मित दो कुण्डल धारण करती है।

दीप्तिमती नीली साड़ी पर चमकते हुए गज मौक्तिक के चंचल हार का भार वहन करने से अत्यन्त मनोहर जान पड़ती है।

शरीर से छिटकती हुई किरणों की राशि से उद्दीप्‍त होने के कारण जिनकी प्रज्वलित दीपमाला के समान शोभा हो रही है, उन सूर्यनन्दिनी यमुनाजी का में ध्यान करता हूं। 

इसके पश्चात् श्री यमुना सहस्त्रनाम का पाठ करे।

1. ओउम कालिन्दी=सच्चिदानन्दस्वरूपा कलिन्दगिरिनन्दिनी 2. यमुना= यमकी की बहन 3. कृष्णा=कृष्णवर्णा 4. कृष्णरूपा = कृष्णस्वरूपा अथवा कृष्णरूपवाली 5. सनातनी= नित्या 6. कृष्णवामांसस्म्भूता = श्रीकृष्ण के बायें कंधे से प्रकट हुई 7. परमानन्‍दरूपिणी= परमानन्‍दमयी 8. गोलोकवासिनी=गोलोकधाम में निवास करने वाली 9. श्यामा= श्यामवर्णा अथवा षोडश वर्ष की अवस्थावाली 10. वृंदावनविनोदिनी= वृन्‍दावन मे मनोरञ्जन करने वाली 11. राधासखी=श्रीराधा की सहचरी 12. रासलीला= रासमण्डल में लीलापरायणा अथवा रासलीलास्वरूपा 13. रासमण्डलमण्डिनी= रासमण्डल को अलंकृत करने वाली 14. निकुञ्जवासिनी=निकुञ्ज में निवास करने वाली 15. वल्ली= लतास्वरूपा 16. रङ्गवल्ली= रासरङ्गस्थलीमें वल्ली के समान शोभा पाने वाली अथवा रङ्गवल्ली नामकी राधा-सखी गोपी से अभिन्नस्वरूपा 17. मनोहरा= मन को हर लेने वाली 18. श्री:= लक्ष्मीस्वरूपा 19. रासमण्डलीभूता= रासमण्डल स्वरूपा अथवा मण्डलाकार होकर रासमण्डल को अलंकृत करने वाली 20. यथीभूता= अपनी सहचरियों के यूथ से संयुक्त
21.हरिप्रिया= श्री कृष्ण की प्यारी 22. गोलोकतटिनी= गोलोकधामकी नदी 23. दिव्या= दिव्यस्वरूपा 24 निकुञ्जतलवासिनी=निकुञ्ज के भीतर निवास करने वाली 25.दीर्घा= बहुत लम्बे परिमाण की 26.ऊर्मीवेगगम्भीरा=तरंगों के वेग से युक्त एवं गहरी 27.पुष्पपल्लववाहिनी=फूलों और पल्लवों को बहाने वाली 28.घनश्यामा= मेघ के समान श्याम कांति वाली, 29.मेघमाला= घनमालास्वरूपा 30.बलाका=बकपङ्क्ति स्वरूपा 31.पद्ममालिनी =कमलों की माला से अलंकृत 32.परिपूर्णतमा=परिपूर्णतम भगवत्स्वरूपा 33. पूर्णा= पूर्णस्वरूपा 34.पूर्णब्रह्मप्रिया= पूर्णब्रह्म श्री कृष्ण की प्रेयसी 35. परा= पराशक्तिस्वरूपा 36. महावेगवती= बड़े वेग वाली 37. साक्षा निकुञ्जद्वारनिर्गता= साक्षत निकुञ्ज के द्वार से निकली हुई 38.महानदी= विशाल सरिता, 39.मन्‍दगति=मन्‍दगति से बहने वाली 40.विरजावेगभेदिनी=गोलोकधाम की विरजा नदी के वेग का भेदन करने वाली

41. अनेकब्रह्माण्डगता=अनेकानेक ब्रह्मण्‍डों में व्याप्त 42.ब्रह्मद्रवसमाकुला= ब्रह्मद्रवस्वरूपा गंगा जी से मिली हुई 43. गंगामिश्रा= गंगा के जल से मिश्रित जल वाली 44. निर्मलाभा= निर्मल आभावली 45निर्मला= सब प्रकार के मलों से रहित 46.सरितांवरा= नदियों में श्रेष्ठ 47.रत्नबद्धोभयतटी=दोनों किनारों की तट भूमि में रत्न से आबद्ध 48. हंसपद्मादिसंकुला= हंसादि पक्षियों और कमल आदि पुष्पों से व्याप्त 49.नदी= अव्यक्त शब्द, कलकल नाद करने वाली 50.निर्मल पानीया = स्वच्छ जल वाली 51.सर्वब्रह्माण्डपावनी =समस्त ब्रह्मण्डों को पवित्र करने वाली 52.वैकुण्ठपरिखीभूता=वैकुण्ठधाम को चारों ओर से घेरकर परिखा (खाईं) के समान सुशोभित 53.परिख=खाईंस्वरूपा, 54.पापहारिणी=पापों का नाश करने वाली 55.ब्रह्मलोकगता=ब्रह्मलोक में पहुँची हुई 56.ब्राह्मी=ब्रह्मशक्तिस्वरूपा 57.स्वर्गा=स्वर्गलोकस्वरूपा 58.स्वर्गनिवासिनी=स्वर्गलोक में निवास करने वाली 59.उल्लसन्ती=तरंगो की तरह ऊपर की ओर उठने वाली 60.प्रोत्पतन्ती=जोर-जोर से उछलने वाली

61.मेरूमाला=मेरूपर्वत को माला की तरह अलंकृत करने वाली
62.महोज्ज्वला=अत्यंतप्रकाशमाना
63. श्रीगंगाम्भ:शिखरिणी = गंगा जी के जल को शिखर का रूप देने वाली
64गण्ड्शैलविभेदिनी=गण्डशैलों का विभेदन करने वाली
65.देशान् पुनन्ती=देशों को पवित्र करने वाली
66.गछन्‍ती=गतिशीला
67.वहन्ती=प्रवहमाना
68.भूमिमध्यगा=धरती के भीतर प्रवेश करने वाली
69.मार्तण्डजतनूज=सूर्य पुत्री
70.पुण्या=पुण्यप्रदा
71.कलिन्दगिरिनन्दिनी=कलिन्द पर्वत से निकली हुई
72.यमस्वसा=यमराज की बहन
73.मन्दहासा= मन्द-मन्द मुसकरानेवाली
74.सुद्विजा=सुन्दर दाँतों वाली
75.रचिताम्बरा=धरती के लिये आच्छादनवस्त्र के रूप में निर्मित
76.नीलाम्बरा=नील वस्त्र धारण करने वाली
77.पद्‍ममुखी=कमलवदना
78.चरन्ती=विचरने वाली
79. चारुदर्शना= मनोहर दृष्टिवाली अथवा देखने में मनोहर
80.रम्भोरू=कदली के खंभे-जैसे ऊरुद्वय धारण करने वाली

81.पद्मनयना=कमललोचना 82.माधवी=माधवप्रिया 83.प्रमदा=यौवनशालिनी 84.उत्तमा=उत्तम 85.तपश्चरन्ती=श्री कृष्ण प्राप्ति के लिये तपस्या करने वाली 86.सुश्रोणी=एक सुन्दर नितम्ब को धारण करने वाली 87.कूजन्नूपुरमेखल= बजते हुय नूपुरों और करधनी से सुशोभित 88. जलस्थिता=पानीमें निवास करने वाली 89.श्यामलाङ्गी=श्यामल अङ्गवाली 90.खाण्ड्वाभा=.खाण्डववन की शोभा 91.विहरिणी=विहारशीला 92.गाण्डीविभाषिणी=अपनि तपस्या का उद्देश्य बताने के लिये गाण्डीवधारी अर्जुन से वार्तालाप करने वाली 93.वन्या=बड़े हुए प्रवाह वाली 94.श्री कृष्णं वरमिच्छ्ती=श्री कृष्ण को पती बनाने की इच्छा रखने वाली 95.द्वारकागमना=द्वारका में आगमन करने वाली 96.राज्ञी=रानी 97.पट्टराज्ञी=पटरानी 98.परगंता=परमात्माको प्राप्त 99.महाराज्ञी=महारानी 100.रत्नभूषा=रत्ननिर्मित आभूषणों से विभूषित

101. गोमती=गौऔं के समुदाय से युक्त अथवा गोमती नदीस्वरूपा 102.तीरचारिणी=तटपर विचरने वाली 103.स्वकीय= श्री कृष्ण की अपनी विवाहिता पत्नी 104.सुखा=सुखस्वरूपा, 105.स्वार्था=अपने अभीष्ट अर्थ को प्राप्त, 106.स्वभक्तकार्यसाधिनी= अपने भक्तों का कार्य सिध्द करने वाली 107.नवलाङ्गा=नूतन अङ्गवाली 108.अबला=स्त्रीरूपा 109. मुग्धा=भोली भाली अथवा मुग्धा नायिका 110.वराङ्गा=सुन्दर अङ्गवाली 111.वामलोचना=बाँके नयनों वाली, 112.अजातयौवन=अप्राप्त यौवना, 113.अदीना=दीनता रहित एवं उदारस्वरूपा 114.प्रभा=प्रभास्वरूपा 115.कान्‍ति=कन्‍तिस्वरूपा 116. द्युति=द्युतिस्वरूपा 117.छवि:=छविस्वरूपा 118.सुशोभा=सुन्दर शोभा वाली 119.परम=उत्कृष्ट्स्वरूपा 120. कीर्ति= कीर्तिस्वरूपा
121.कुशला= चतुरा 122. अज्ञातयौवना= अपने यौवन को न जानने वाली 123.नवोढा= नवविवाहिता नायिका 124.मध्यगा= मुग्धा और प्रगल्भा के बीच की अवस्था वाली 125.मध्या= मध्या नायिका 126.प्रौढि:= प्रौढता से युक्त 127.प्रौढा=प्रौढस्वरूपा 128.प्रगल्भका=प्रगल्भानायिका 129.धीरा=धीरस्वरूपा 130.अधीरा=भगवद्दर्शन के लिये अधीर रहने वाली 131.धैर्यधरा=धैर्यधारिणी 132.ज्येष्ठा=ज्येष्ठ अवस्थावली 133.श्रेष्ठा=गुणों से श्रेष्ठ 134.कुलाड़्गना=कुलवधू 135.क्षणप्रभा=विद्युत् के समान कांतिमती 136.चञ्चला= वेगशालिनी 137. अर्च्या= पूजनीय 138.विद्युत्=विद्योतमाना 139.सौदामनी =विद्युत्स्वरूपा 140.तडित्=घनश्याम् के अङ्क में विद्युल्लेखा-सी शोभामाना

141.स्वाधीनपतीका=स्नेह और प्यार से पती को वश मे रखने वाली 142. लक्ष्मी=लक्ष्मीस्वरूपा 143.पुष्टा= पुष्ट अङ्गों वाली अथवा अनुग्रहमयी 144.स्वाधीनभर्तृका=स्वाधीनपती का 145.कलहान्तरिता=प्रेम-कलह के कारण कभी-कभी प्रियतम के वियोग का कष्ट सहन करने वाली नायिका 146.भीरु:=भीरु स्वभाव वाली 147.इच्छा=प्रियतम की कामना का विषय अथवा अभिलाषारुपिणी 148.प्रोत्कण्ठिता=प्रिय के दर्शन या मिलन के लिये उत्सुक रहने वाली 149.आकुला=प्रेम-परिपूर्ण अथवा प्रियतम की सेवा कार्य मे व्यस्त 150.कशिपुस्था=शय्या पर विराजित रहने वाली 151.दिव्यशय्या=श्यामसुन्दर के लिये दिव्य शय्या प्रस्तुत करने वाली 152.गोविन्दहृतमानसा=गोविन्द ने जिसके मन को हर लिया है, ऐसी 153.खण्डिता=खण्डिता नायिकास्वरूप 154.अखण्डशोभाढ्या=अविकल शोभा से समपन्न 155.विप्रलब्धा=विप्रलब्धा-नायिका स्वरूप 156.अभिसारिका=प्रियतम श्री कृष्ण से मिलने के लिये संकेत-स्थान पर जाने वाली 157.विरहार्ता=प्रियतम के विरह कि अनुभूति से पीड़ित 158 विरहिणी=वियोगिनी 159.नारी=नरावतार श्री कृष्ण की भार्या 160 प्रोषितभर्तृका=जिसका पती परदेश में गया हो,ऐसी नायिका स्वरूपा
161. मानिनी=मानवती 162.मानदा=मान देने वाली 163.प्राज्ञा=विदुषी 164.मन्दारवनवासिनी= कल्पवृक्ष के कानन में निवास करने वाली 165.झंकारिणी=चलते-फिरते या नृत्य करते समय आभूषणों की झंकार फैलाने वाली 166.झणत्कारी=झणत्कार या सिञ्जन-ध्वनि करने वाली 167.रणन्मञ्जीरनूपुरा=बजते हुए नूपुर और मञ्जीर धारण करने वाली 168.मेखला=वृन्दावन की नीलमणिमयी करधनी के समान सुशोभित 169.अमेखला=साधारण अवस्था में मेखला से रहित 170.काञ्ची= काञ्ची नामक आभूषण स्वरूपा 171.अकाञ्चनी=काञ्चनरहित 172.काञ्चनामयी=सुवर्णस्वरूपा 173.कञ्चुकी=कञ्चुकधारिणी 174.कञ्चुकमणि=कञ्चुकमणिस्वरूपा 175.श्रीकण्ठा=शोभायुक्त कण्ठवाली 176.आढ्या=(श्री कृष्ण रूप) सम्पत्तिशालिनी 177.महामणि:=महामणिस्वरूपा अथवा बहुमूल्य मणि धारण करने वाली 178.श्रीहारिणी=श्री हारधरिणी 179.पद्महारा= कमलों की माला से अलंकृत 180. मुक्ता=नित्यमुक्त

181.मुक्तफलार्चिता=मुक्ताफलों से पूजित 182. रत्नकङ्कणकेयूरा=रत्ननिर्मित कंगन और केयूर(भुजबन्द) धारण करने वाली 183.स्फुरदङ्गुलिभूषणा=जिनकी अङ्गुलियों के भूषण उद्भाषित हो रहें है ऐसी 184.दर्पणा=दर्पणस्वरूपा 185.दर्पणीभूता=अपने जल की निर्मलता के कारण दर्पण का काम देने वाली 186.दुष्टदर्पविनाशिनी=दुष्टों के घमंड को चूर करने वाली 187.कम्बुग्रीवा=शङ्ख के समान सुन्दर कण्ठवाली 188.कम्बुधरा=शङ्खनिर्मित आभूषण धारण करने वाली 189.ग्रैवेयकविराजिता=कण्ठभूषण से सुशोभित 190.ताटङ्किनी=ताटङ्क (तरकी) नामक आभूषण विशेष को धारण करने वाली 191.दन्तधरा=दन्तधारिणी 192.हेमकुण्डलमण्डिता=काञ्चननिर्मित कुण्डलों से अलंकृत 193.शिखाभूषा=अपनी चोटी को विभूषित करने वाली 194.भालपुष्पा=ललाट देश में पुष्पमय श्रृङ्गार हारण करने वाली 195.नाशामौक्तिकशोभिता=नाक मे मोती की बुलाक से शोभित 196.मणिभूमिगता=मणिमयी भूमि पर विचरने वाली 197 देवी=दिव्यास्वरूपा 198.रैवताद्रिविहारिणी= श्रीकृष्ण की पटरानी के रूप में रैवतक पर्वत पर विहार करने वाली 199.वृन्दावनगता=वृन्दावन मे विद्यमाना 200.वृन्दा=वृन्दावन की अधिष्ठातृ देवी-स्वरूपा

गर्ग संहिता
माधुर्य खण्‍ड : अध्याय 19

201.वृन्दारण्यनिवासिनी=वृन्दावन में निवास करने वाली
202.वृन्दावनलता=वृन्दावन की लताओं के साथ तादात्म्य को प्राप्त हुई
203.माध्वी=मकरन्दस्वरूपा
204.वृन्दारवन्यविभूषणा=वृन्दावन को विभूषित करने वाली
205.सौन्दर्यलहरी लक्ष्मी:=सुन्दरता की तरङ्गों से युक्त् लक्ष्मीस्वरूपा
206.मथुरातीर्थवासिनी=मथुरापुरी रूप तीर्थ में निवास करने वाली
207.विश्रान्तवासिनी='विश्रान्त' तीर्थ (विश्रामघाट) में वास करने वाली
208.काम्या=कमनीया
209.रम्या=रमणीया
210.गोकुलवासिनी=गोकुल में निवास करने वाली
211.रमणस्थलशोभाढ्या=रमण स्थली की शोभा बढ़ाने वाली
212.महावनमहानदी='महावन' नामक वन में प्रवाहित होने वाली महती नदी
213.प्रणता=भक्तजनोंद्वारा वन्दिता
214.प्रोन्नता=अत्यंत उत्कृष्ट गोलोक धाम में स्थित अथवा ऊँची लहरों के कारण उन्नत
215.पुष्टा=प्रेमानुग्रह से परिपुष्ट्
216.भारती=भारतवर्ष की नदी
217.भरतार्चिता=भरत के द्वारा पूजित
218.तीर्थराजगति:=तीर्थराज प्रयाग की आश्रयभूता
219.गोत्रा=गोओं का त्राण करने वाली अथवा गिरिस्वरूपा
220.गङ्गासागरसंगमा=गङ्गा तथा सागर से संगत

221.सप्ताब्धिभेदिनी=सात समुद्रों का भेदन करने वाली 222.लोला=लोल लहरों वाली 223.बलात्सप्तद्वीपगता=बलपूर्वक सातों द्वीपों में वाली 224.लुठन्ती=धरती पर लोटने वाली 225.शैलभिद्यन्ती=पर्वतों का भेदन करने वाली 226.स्फुरन्ती=स्फुरणशील अथवा अपनी दिव्य प्रभा बिखेरने वाली 227. वेगवत्तरा= अतिशय वेगशालिनी 228. काञ्चनी=स्वर्णमयी 229.काञ्चनीभूमि:=गोलोक की स्वर्ण मयीधरती पर प्रवाहित होने वाली 230.काञ्चनीभऊमिभाविता=स्वर्णमयी भूमि पर प्रगट 231.लोकदृष्टि=जगत् को दिव्य दृष्टि प्रदान करने वाली 232.लोकलीला=लोक में लीला करने वाली 233.लोकालोकाचलार्चिता=लोकालोक पर्वत पर पूजित होने वाली 234.शैलोद्गता=कलिन्दपर्वत से निकली हुई, 235.स्वर्गगता=मन्दकिनी रूप से स्वर्ग में गयी हुई 236.स्वर्गार्चा=स्वर्ग में अर्चित होने वाली 237.स्वर्गपूजिता=स्वर्गलोक में पूजित 238.वृन्दावनी=वृन्दावन की अधिष्ठातृस्वरूपादेवी 239.वनाध्यक्षा=वन की स्वामिनी
 240.रक्षा=रक्षित या रक्षारूपा

241.कक्षा=वृन्दावन के लिये मेखलारूपा
242.तटीपटी=तटभूमि को वस्त्र की भाँति ढकने वाली
243. असिकुण्डगता=असिकुण्ड में प्राप्त
244.कच्छा=कछार की भूमि स्वरूपा
245 स्वच्छन्दा=स्वच्छन्दगामिनी
246.उच्छलिता=(वेग से) उछलने वाली
247.आदिजा=आदिभूत श्री कृष्ण के वामांस से उद्भूत (अथवे अद्रिजा पाठ माना जाय तो पर्वत से उत्पन्न हुई)
248.कुहरस्था=सरस्वती रूप से भू छिद्र में अथवा भोगवती रूप से पाताल-विवर में स्थित
249.रथ-प्रस्था=श्रीकृष्ण की पटरानी के रूप में रथ पर यात्रा करने वाली
250.प्रस्था=प्रस्थानशीला
251.शान्ततरा= परम शान्तीमयी
252.आतुरा=श्रीकृष्ण दर्शन के लिये आतुर रहने वाली
253.अम्बुच्छ्टा=जल की छ्टा से शोभित
254 शीकराभा=कुहरों से सुशोभित होने वाली
255.दर्दुरा=मेढकों का आश्रय अथवा बादाल के समान श्याम कान्तिवाली
256.दार्दुरीधरा= अपने जल के कल-कल नाद से दादुरों की-सी ध्वनि धारण करने वाली
257.पापाङ्कुंशा=पापों को नष्ट करने के लिये अङ्कुशस्वरूपा
258 पापसिंही=पापरूपी गजराज को नष्ट करने के लिये सिंही के तुल्य
259.पापद्रुमकुठारिणी=पापरूपी वृक्षक उच्छेद करने के लिये कुठाररूपा
260.पुण्यसंघा=पुण्यसमुदायरूपा

261.पुण्यकीर्ति:=पवित्र कीर्ति वाली अथवा जिनका कीर्तन पुण्य प्रदान करने वाला है ऐसी 262. पुण्यदा=पुण्यदायिनी 263. पुण्यवर्द्धिनी= अपने दर्शन से पुण्य की वृध्दि करने वाली 264. मधुवननदी=मधुवन में बहने वाली नदी 265. मुख्या= एक प्रधान नदी 266. अतुला= तुलनारहित 267. तालवनस्थिता=तालवन में स्थित रहने वाली 268. कुमुद्वननदी=कुमुद वन की नदी 269. कुब्जा=टेढ़ी -मेढ़ी 270. कुमुदा=भगवती दुर्गा स्वरूपा 271. अम्भोजवर्द्धिनी=अपने जल में कमलों को बढ़ाने वाली 272. प्लवरूपा= संसारसागर से पार होने के लिये नौकास्वरूपा 273. वेगवती=वेगशालिनी 274. सिंहसर्पादिवाहिनी=अपने जल की धारा में सिंहों व सर्पादि जंतुओं को बहा ले जाने वाली 275. बहुली=बहुलरूपवाली 276. बहुदा=बहुत देने वाली 277. भह्वी=भूम (ब्रह्म) स्वरूपा 278. बहुला=गोरूपा 279. वनवन्दिता=वनों द्वारा वन्दित 280. राधाकुण्डकला= अपनी कला से राधाकुण्ड में स्थित

281.आराध्या=आराधन के योग्य 282. कृष्णकुडजलाश्रिता=कृष्ण के कुण्ड में निवास करने वाली 283.ललिताकुण्डगा=ललिताकुण्ड में व्याप्त 284.घण्टा=घण्टा-ध्वनि के सदृश अनुरणनात्मक शब्द करने वाली 285.विशाखा=विशाखा सखी स्वरूपा 286.कुण्डमण्डिता=कुण्डों (ह्रदों) से सुशोभित 287.गोविन्दकुन्दनिलया=गोविन्द कुण्ड में निवास करने वाली 288.गोपकुण्ड तरंगिणी= गोपकुण्ड में तरंगित होने वाली 289.श्रीगङ्गा=श्रीगङ्गास्वरूपा 290.मानसीगङ्गा=मानसी गङ्गास्वरूपा 291.कुसुमाम्बरभाविनी=पुष्पमय वस्त्र से सुशोभित अथवा कुसुमसरोवर के अवकाश में प्रकट होने वाली 292.गोवर्द्धिनी=गोवर्धननाथ के शक्ति अथवा गौओं की वृद्धि करने वाली 293.गोधनाढ्या= गोधन से सम्पन्न 294. मयूरवरवर्णिनी=मोरों के समान सुन्दर वर्णवाली 295.सारसी=सरोवरों की जल सम्पत्ति अथवा सारस पक्षियों की आश्रयभूता 296.नीलकण्ठाभा=नीलकण्ठ या मयूर की-सी आभावली 297.कूजत्कोकिलपोतकी= जहाँ कोकिलाकुमारियों के कल-कूजन होते रहते है ऐसी 298.गिरिराजप्रसु:=गिरिराज हिमालय के कलिन्दपर्वत से प्रकट 299.भूरि:=बहुवैभवशालिनी 300.आतपत्रा=तटपर रहने वाले लोगों की धूप के कष्ट से रक्षा करने वाली

301.आतपत्रिणी=पटरानी के रूप मे छ्त्र धारण कर्ने वाली
302.गोवर्धनाङ्कगा=गोवर्धनगरि की गोद में विराजमान
303.गोदन्ती=हरताल के समान रंग वाले केसर आदि से अमोदित
304.दिव्यौषधिनिधि:=दिव्य ओषधियों की निधी
305.सृति:=सद्रतिकी राह
306.पारदि= भवसागर से पार कर देने वाली दिव्य शक्ति
307.पारदमयी=पारदस्वरूपा
308.नारदी=नार अर्थात जल प्रदान करने वाली
309.शारदी= शरत्कालीन शोभारूपा
310.भृति:= भरण पोषण का साधन बनी हुई 311.श्रीकृष्णचरणाङ्कस्था= भगवान श्रीकृष्ण के चरणों के अङ्क में विराजित
312. अकामा= लौकिक कामनाओं से रहित (अथवा 'कामा' कामस्वरूपा)
313.कामवनाञ्चिता=काम वन में पूजित
314.कामाटवी=कामवनरूपा
315.नन्दिनी=सबको आनन्दित करने वाली
316.नन्दग्राममही=नन्द ग्रामस्थित भूमिरूपा
317.धरा:=पृथ्वीरूपा
318.बृहत्सानुद्युतिप्रोता='बृहत्सानु' पर्वत के शिखर की शोभा से संयुक्त
319.नन्दीश्वरसमन्विता=नन्द गाँव के नन्दीश्वरगिरि से समन्विता
320.काकली=कोयलों की कुहू-ध्वनि रूप में स्थित

321.कोकिलमयी=कोयल से व्याप्ता 322.भाण्डीरकुशकौशला=भाण्डीर वन में कुशोत्पाटन के कौशल से युक्त। 323.लोहार्गलप्रदा=श्रीकृष्ण के लिये अपने प्रेम के द्वारा लोहे की अर्गला लगा देने वाली 324.कार=(श्री कृष्ण को अपने प्रेम के द्वारा रोके रखने के लिये) कारारूपा 325.काश्मीरवसना=केसर के रंग में रंगे हुए वस्त्र धारण करने वाली 326.वृता=श्री कृष्ण के द्वारा स्वीकृता 327.बर्हिषदी= बर्हिषदी पुरीरूपा 328.शोणपुरी=शोणपुरीरूपा 329.शूरक्षेत्रपुराधिका=शूरक्षेत्रपुर से भी अधिक माहात्म्य वाली 330.नानाभरणशोभाढ्या=विविध प्रकार के आभूषणों की शोभा से सम्पन्न 331.नानावर्णसमन्विता=नाना प्रकार के रंगों से युक्त 332.नानानारीकदम्बाढ्या=नाना प्रकार की स्त्रियों के समुदाय से युक्त 333.नानारङ्गमहीरुहा=तटवर्ती विविध रंगो के वृक्षों से सुशोभित 334.नानालोकगता=नाना लोकों में पहुँची हुई 335.अभ्यर्चि:=जिनकी तेजोराशि सब ओर फैली हुई हो एसी 336.नानाजलसमन्विता=नाना नदियों के मिले हुए जल से युक्त 337.स्त्रीरत्नम्=स्त्रियों में रत्न स्वरूपा 338.रत्ननिलया=रत्न निर्मित गृह में निवास करने वाली 339.ललना= श्रीकृष्णकामिनी 340.रत्नरञ्जिनी=रत्नों के द्वारा विविध रंगों का प्रकाश फैलाने वाली

361.ताम्बूलचर्चिता=ताम्बूल से रञ्जित 362.चर्चा=कस्तूरी चन्दनादि आलेपमयी 363.मकरन्द मनोहरा=कमलादि के मकरन्द से मन को हर लेने वाली 364.सकेशरा=केसरवती 365.केशरिणी=केसर धारण करने वाली 366.केशपाशाभि-शोभिता=केशपास द्वारा सब ओर से सुशोभित 367.कज्जलाभा=काजल की-सी काली आभावाली 368.कज्जलाक्ता=नेत्रों में काजल की शोभा से युक्त अथवा काजल से रँगी हुई 369.कज्जली=कजली के समान काली 370.कलिताञ्जना= नेत्रों में अञ्जन धारण करने वाली 371.अलक्तचरणा=चरणों में महावर का रंग लगाने वाली 372.ताम्रा=ताम्रवर्णा 373.लाला=लालनीया 374.ताम्रीकृताम्बरा=ताँबे के समान लाल वस्त्र धारण करने वाली 375.सिन्दूरिता=सीमंत में सिन्दूर धारण करने वाली 376.अप्लितवाणी=जिसकी वाज़्नी किसी दोष से लिप्त नहीं होती ऐसी 377.सुश्री=उत्तम शोभा से युक्त 378.श्रीखण्डमण्डिता=चन्दन से अलंकृत 379.पाटीरपङ्कवसना=चन्दन पङ्कमय वस्त्र धारण करने 380.जटामांसी= जटामांसी के रूप मे स्थित

381. स्रगम्बरा=पुष्प मालाओं को वस्त्र रूप में धारण करने वाली 382. आगरी=आगर(अमावस्या) के समान (कृष्ण) वर्ण वाली 383. अगुरुगन्धाक्ता=अगुरु की गंध से अभिषिक्त 384. तगराश्रितमारुता=जिसकी हवा में तगर की गन्ध समायी हुई है ऐसी। 385. सुगन्धितैलरुचिरा=सुगन्धित तैल (इत्र आदि) से मनोहर 386. कुन्तलालि:=जिनकी अलकों पर (सुगन्ध से आकृष्ट ) भ्रमर मँड्राते रहते हैं ऐसी 387. सकुन्तला=कुंतल राशि से युक्त 388. शकुन्तला=शकुन्तों-पक्षियों का स्वागत करने वाली 389. अपांसुला=पतिव्रता 390. पातिव्रत्यपरायणा=पातिव्रत धर्म के पालन में तत्पर 391. सूर्यप्रभा=सूर्य के समान उद्भासित होने वाली 392. सूर्यकन्या=सूर्य की पुत्री 393. सूर्यदेह-समुद्भवा=सूर्य के शरीर से उत्पन्ना 394. कोटिसूर्यप्रतिकाशा=करोंड़ों सूर्यों के समान तेजस्विनी 395. सूर्यजा=सूर्यपुत्री 396. सूर्यनन्दिनी=सूर्य देव को आनन्द प्रदान करने वाली 397. संज्ञा=सम्यक् ज्ञान स्वरूपा 398. संज्ञासुता=संज्ञा की पुत्री 399. स्वेच्छा=स्वाधीना
 400. असंज्ञा=(प्रियतम के प्रेम में) बेसुध हो जाने वाली

401. संज्ञा=चेतनारूपा
402. मोदप्रदायिनी=आनन्द प्रदान करने वाली
403. संज्ञापुत्री=संज्ञा की बेटी
404. स्फुरच्छाया=उद्भासित कान्तिवाली
405. तपती-तापकारिणी=(सौतेली बहिन) तपती को ताप देने वाली
406. सावर्ण्यानुभवा=श्री-कृष्ण के साथ वर्ण सादृश्य का अनुभव करने वाली
407. देवी=देव कन्या
408. वडवा=वडवारूपा
409. सौख्य-दायिनी=सौख्य प्रदान करने वाली
410. शनैश्चरानुजा=शनैश्चर की छोटी बहिन
411. कीला=ज्वालामयी
412. चन्द्रवंश-विवर्द्धिनी=चन्द्र वंश की वृद्धि करने वाली
413. चन्द्रवंशवधू:=चन्द्रवंश की वधू
414. चन्द्रा=अह्लाद प्रदान करने वाली
415. चन्द्रावलि-सहायिनी=चन्द्रावलि-सखि की सहायता करने वाली
416. चन्द्रावती=चन्द्रावतीस्वरूपा
417. चन्द्र लेखा=चन्द्रलेखास्वरूपा
418. चन्द्रकांता=चन्द्रमा के समान कांतिमती
419. अनुगा=(सदा) प्रियतम का अनुगमन करने वाली
420. अंशुका=उज्ज्वल-वस्त्रधारिणी
421.भैरवी=भैरवप्रिया
422.पिङ्गलाशङ्की=सूर्य के पारिपार्श्वक पिङ्गल से आशङ्कित होने वाली
423.लीलावती=भाँति-भाँति की लीला करने वाली
424.आगरीमयी=अगर की सुगन्ध से व्याप्त
425.धनश्री=धनलक्ष्मी या रागिनीविशेष
426.देवगान्धारी=रागिनीविषेश
427.स्वर्मणि:=स्वर्गलोक की मणी
428.गुणवर्द्धिनी=गुणों की वृध्दि करने वाली
429. व्रजमल्ला= ब्रज मण्डल में मल्ल स्वरूपा
430.बन्धकारी=विरोधियों को बन्धन में डालने वाली
431.विचित्रा=विचित्र रूप और शक्ति से सम्पन्न
432.जयकारिणी=विजय प्राप्त कराने वाली
433. गान्धारी
434.मञ्जरी
435.टोडी
436.गुर्जरी
437.आशावरी
438.जया
439.कर्णाटी= गान्धारी से लेकर कर्णाटी तक विषेश रागिनियों के नाम हैं। ये समस्त रागिनियाँ यमुना जी से अभिन्न हैं।
440.रागिणी=रागिनीस्वरूपा
441.गौरी=गौरी नाम की रागिनी
442.वैराटी=रागिनी विशेष
443.गौरवाटिका=रागिनी-विशेष अथवा गौरतेज-स्वरूपा श्री राधा के लिये उद्यानरूपिणी
444.चतुश्चन्द्रा
445.कालाहेरी
446.तैलङ्गी
447.विजयावती
448.ताली=चतुश्चन्द्रासे लेकर ताली तक राग-रागनियाँ और ताल के नाम हैं
449.तलस्वरा=ताली बजाकर स्वर की सूचना देने वाली
450.गाना=गानस्वरूपा
451.क्रियामात्रप्रकाशिनी=ताल के क्रिया मात्र को प्रकाशित करने वाली
452.वैशाखी
453.चञ्चला
454.चारु:
455.माचारी
456. घूघटी
457.घटा
458.वैरागरी
459.सोरटी
460.ईशा
461.कैदारी
462.जलधारिका-=वैशाखी से लेकर जलधारिकापर्यंत सभी नाम विशेष रागिनी आदि के सूचक हैं।
463.कामाकरश्री
464.कल्याणी
465.गौरकल्याणमिश्रिता
466. रामसंजीविनी
467.हेला
468.मन्दारी
469.कामरूपिणी- ये सब भी विशेष प्रकार की रागनियाँ हैं।
470.सारङ्गी
471.मारुती
472. होढा
473.सागरी
474. कामवादिनी
475.वैभासी
476.मङ्गला-ये सब भी रागनियों के ही नाम हैं।
477.चान्द्री=रास पूर्णिमा की चाँदनी स्वरूपा
478.रासमण्डलमण्डना=रासमण्डल को मण्डित करने वाली
479.कामधेनु:=कामधेनु की भाँति व्यक्ति की मनोवाञ्छित कामना को पूर्ण करने वाली
480.कामलता=कामना पूर्ण करने वाली कल्पलतास्वरूपा
481.कामदा=अभीष्ट मनोरथ देने वाली
482.कमनीयका=कमनीया
483.कल्पवृक्षस्थली=कल्पवृक्षों की स्थानभूता
484. स्थूला=स्थूलरुपिणी
485.क्षुधा= बुभुक्षास्वरूपिणी
486. सौधनिवासिनी= महल में रहने वाली
487.गोलोकवासिनी=गोलोकधाम मे निवास करने वाली
488. सुभ्रू:= सुन्दर भौंहों वाली
489.यष्तिभृत्= छढ़ी धारण करने वाली
490. द्वार-पालिका= द्वाररक्षिका
491.श्रृङ्गारप्रकरा= श्रृङ्गार-साधन- सामिग्री-समुदाय स्वरूपा
492.श्रृंङ्गा= मन्मथोद्भेदस्वरूपा
493. स्वच्छा= विमलस्वरूपा
494.शय्योपकारिका= प्रिया-प्रियतम के लिये शय्या सुसज्जित करने मे उपकारिणी
495.पार्षद= श्रीराधा- कृष्ण की पार्षद स्वरूपा
496. सुसखीसेव्या= सुन्दर सखियों द्वारा सेवनीया
497.श्री वृन्दावनपालिका= श्री वृन्दावन की रक्षा करने वाली
498.निकुञ्जभृत= निकुञ्ज का पोषण करने वाली
499. कुञ्जपुञ्जा= कुञ्जसमुदायस स्वरूपा
500.गुञ्जाभरणभूषिता= गुञ्जा के आभूषणों से विभूषित।

501. निकुञ्जवासिनी=निकुञ्ज में निवास करने वाली
502.प्रोष्या= प्रवासिनी
503. गोवर्धनतटीभवा= गोवर्धन की उपत्यका में मानसी गङ्गा के रूपा में प्रकट
504.विशाखा= विशाखासखी स्वरूपा
505. ललिता= ललिता -सखीस्वरूपा
506. रामा= श्री कृष्णरमणी
507.नीरुजा= रोगरहित
508.मधुमाधवी= मधुमास की माधवी लतारूपिणी।
509.एक= अद्वितीया
510. नैकसखी= अनेक सखियों वाली
511.शुक्ला= शुध्दस्वरूपा
512सखीमध्या= सखियों के मध्य में विराजमान
513.महमना:= विशालहृदया
514. श्रुतिरूपा= गोपी रूप में श्रुतिस्वरूपा
515.ऋषिरूपा= ऋषि स्वरूपा गोपी
516.मैथिला:= गोपी रूप में उत्पन्न मिथिला वासिनी स्त्रियाँ
517.कौशला: स्त्रिय:=गोपी रूप में स्थित कौशलवासिनी स्त्रियाँ
518.अयोध्यापुरवासिन्य:= गोपी रूप में उत्पन्न अयोध्यानगर की स्त्रियाँ
519. यज्ञसीता:= यज्ञसीता स्वरूपा गोपियाँ
520. पुलिन्दका:= गोपी भाव को प्राप्त पुलिन्द-कन्याएँ
521.रमावैकुण्ठ-वासिन्य= लक्ष्मी जी के वैकुण्ठ में निवास करने वाली स्त्रियाँ ( जो गोपी रूप को प्राप्त हुई थीं)
522. श्वेत-द्वीपसखीजना:= श्वेतद्वीप निवासिनी सखियाँ
523.ऊर्ध्ववैकुण्ठवासिन्य:= ऊर्ध्ववैकुण्ठ मे वास करने वाली सखियाँ
524. दिव्याजित-पदाश्रिता:=दिव्य अजित पद के आश्रित सखियाँ
525.श्रीलोकाचलवासिन्य:= श्री लोकाचल में निवास करने वाली सखियाँ
526.सागरोद्भवा: श्रीस्ख्य:= समुद्र से उत्पन्न श्री लक्ष्मी जी की सखियाँ
527.दिव्या:= दिव्यरूपा गोपियाँ
528. अदिव्या:= मानवरूपिणी गोपियाँ
529. दिव्याङ्गा= दिव्य अङ्गों वाली
530.व्याप्ता:= सर्वव्यापिनी
531.त्रिगुणवृत्तय:= त्रिगुणात्मक वृत्तिस्वरूपा
532.भूमिगोप्य:= भूतल पर उत्पन्न गोपियाँ
533. देवनार्य:= देवाङ्गनास्वरूपा गोपियाँ
534.लता:= लतारुपिणी गोपियाँ
535.ओषधिवीरुध;= ओषधि एवं लता-झाड़ी आदि स्वरूपा गोपङ्गनाएँ
536. जालंधर्य:= गोपी भाव को प्राप्त जालंधरी स्त्रियाँ
537.सिन्धुसुता:= समुद्र कन्याएँ
538.पृथुबर्हिष्मतीभवा:= राजा पृथु की बर्हिष्मतीपुरी में होने वाली स्त्रियाँ जो गोपी भव को प्राप्त हुईं थी।
539.दिव्याम्बरा:= दिव्यवस्त्रधारिणी गोपियाँ
540.अप्सरस:= गोपी भाव को प्राप्त अपसराएँ
541.सौतला:= सुलतलोकवासिनी असुराङ्गनएँ जिन्हें गोपी भाव की प्राप्ती हुई थी।
542.नागकन्यका:= नागकन्या स्वरूपा गोपियाँ
543.परं धाम= परमधामस्वरूपा
544.परं ब्रह्मा= परब्रह्मास्वरूपा
545. पौरुषा:= पुरुषार्थ स्वरूपा
546. प्रकृति परा= पराप्रकृतिस्वरूपा
547. तटस्था= तटस्थाशक्ति स्वरूपा
548. गुण्भू:= गुणों की जन्मभूमि
549. गीता= सबके द्वारा जिसका यशोगान होत हो वह अथवा भगवद्गीता स्वरूपा
550. गुणागुणमयी= गुणागुणस्वरूपा
551.गुणा= दिव्यगुणात्मिका
552. चिद्घना= चिदानन्दघनस्वरूपा
553. सदसन्माला= सदसद्-समूहात्मिका
554. दृष्टि:= ज्ञानस्वरूपा अथवा दर्शनस्वरूपा
555.दृश्या:= दृश्यस्वरूपा
556.गुणाकरी= गुणों की निधी रूपा
557. महत्तत्त्वम् = समष्टि बुध्दिरूपा
558. अहंकार:= अहंकार स्वरूपा
559. मन:= मन:-स्वरूपा
560.बुध्दि:=बुद्धिरूपा
561. प्रचेतना= प्रकृष्ट चेतना स्वरूपा
562. चेतो:= चित्तरूपा
563. वृत्ति:= व्यवहारस्वरूपा
564. स्वान्तरात्मा= निजान्तरत्मास्वरूपा
565. चतुर्थी= जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से अतीत तुरीयास्वरूपा
566. चतुरक्षरा= प्रवण के चार अक्षर-अकार, उकार, मकार और अर्धमात्रा-ये जिसके स्करूप हैं वह
567. चतुर्व्यूहा= वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्र और अनिरुध्द -ये चार व्यूह जिसके स्वरूप हैं वह
568. चतुर्मूर्ति:= एकपदी, द्विपदी, त्रिपदी, और चतुष्पदी-इन चार मूर्तियों वाली गायत्री अथवा चतुर्व्यूहस्वरूपा
569. व्योम= आकाशरूपा
570. वायु:= वायुरूपा
571. अद:= दृश्य प्रपञ्च के रूप में स्थित
572. जलम्= जलस्वरूपा
573. मही= पृथ्वीरूपा
574. शब्द:= शब्द स्वरूपा
575. रस:= रसस्वरूपा
576. गन्ध:= गन्धस्वरूपा
577. स्पर्श:= स्पर्शस्वरूपा
578. रूपम्= रूपस्वरूपा
579. अनेकधा= नाना-रूप वाली
580. कर्मेन्द्रियम्= कर्मेन्द्रियस्वरूपाu
581.कर्ममयी= कर्मस्वरूपा
582. ज्ञानम्= ज्ञानमयी
583. ज्ञानेन्द्रियम्= ज्ञानेन्द्रियस्वरूपा
584. द्विधा= प्रकृति -पुरुषरूप दो शरीरवाली अथवा ज्ञानेन्द्रिय-कर्मेन्द्रिय- भेद से द्विविध इन्द्रियरूप
585. त्रिधा= क्षर, अक्षर और पुरुषोत्तम-त्रिविध रूप वाली अथवा अध्यात्म, अधिभूत,अधिदैव-भेद से त्रिविध रूप वाली
586. अधिभूतम्= भौतिक सृष्टि में व्याप्त
587. अध्यात्मम्= अध्यात्मस्वरूपा
588. अधिदैवम्=अभिदैविक रूपवाली
589. अधिष्ठितम्=सर्वरूपों में अधिष्ठित
590. ज्ञानशक्ति:= ज्ञानशक्ति
591. क्रियाशक्ति:= क्रियाशक्ति
592. सर्वदेवाधिदेवता= समस्त देवताओं की अधिदेवी
593. तत्त्वसंघा=तत्त्वसमूहरूपा
594. विरणमूर्ति:= विराट्स्वरूपा
595. धारणा=धारणाशक्ति
596. धारणामयी= धारणाशक्तिरूपा
597. श्रुति:= वेदरूपा
598. स्मृति:= धर्मशास्त्ररूपा
599. वेदमूर्ति:= वेदत्मिका
600. संहिता= संहितास्वरूपा

601. गर्गसंहिता= गर्गसंहिता 602. पाराशरी= पाराशरसंहिता (विष्णुपुराण) रूपा 603. सृष्टि:= सृष्टिरूपा अथवा पाराशरी रचनारूपा 604. पारहंसी= परमहंस-विद्यारूपा अथवा परमहंससंहिता 605. विधातृका= विधातृ-स्वरूपा अथवा ब्रह्मसंहिता 606. याज्ञवल्की= याज्ञवल्क्यस्मृतिस्वरूपा 607. भागवती= भगवान की शक्ति अथवा वैष्ण्वागमरूपा 608. श्रीमद्भागवतार्चिता= श्रीमद्भागवत के द्वारा पूजित-प्रशंसित 609. रामायणमयी= वाल्मीकि-रामायण अथवा प्राचेतससंहिता अथवा.रामचरितस्वरूपा 610. रम्या= रमणीया 611. पुराणपुरुषप्रिया= पुराणपुरुष श्री कृष्ण की प्रिया 612. पुराणमूर्त्ति:= पुराणस्वरूपा 613. पुण्याङ्ग़ा= पुण्यशरीर वाली 614. शास्त्र-मूर्ती:=शास्त्रस्वरूपा 615. महोन्नता= परम उन्नत 516. मनीषा= बुध्दिरूपा 517. धिषणा= प्रज्ञारूपा 518. बुद्धि:= मेधारूपा 519. वाणी= वाग्देवता 620. धी:= बुद्धिरूपा

621. शेमुषी= बुद्धिरूपा 622. मति:= निश्चयरूपा 623. गायत्री= गायत्रीमंत्रस्वरूपा 624. वेदसावित्री= वेदिक्त गायत्री 625. ब्रह्माणी= ब्रह्मशक्ति 626. ब्रह्म-लक्षणा= वेदमंत्रोंद्वारा लक्षित होने वाली 627. दुर्गा= दुर्गम्या अथवा दुर्गा देवी 628. अर्पणा= तपस्विनी पार्वती 629. सती=दक्षकन्या सती 630. सत्या= सत्यस्वरूपा अथवा सत्यभामा 631. पार्वती= गिरीराज हिमालय की पुत्री 632. चंडिका= असुरसंहारिणी शक्ति 633. अम्बिका=जगन्माता 634. आर्या= श्रेष्ठस्वरूपा 635. दाक्षायणी= दक्षप्रजापति की कन्या 636. दाक्षी= दक्षपुत्री 637. दक्षयज्ञविघातिनी= दक्ष- यज्ञ विध्वंस में कारणभूता 638. पुलोमजा= पुलोम दानव की पुत्री शची-स्वरूपा 639. शची= इन्द्रपत्नी 640. इन्द्राणी= शची

641. देवी= प्रकाशमाना 642. देववरार्पिता= देवेश्वर इन्द्र को अर्पित 643. वायुनाधारिणी= वायु के द्वारा धारण करने वाली अथवा वायुना=ज्ञानस्वरूपा और धारिणी=धारणशक्ति 644. धन्या= धन्यवाद के योग्य 645. वायवी= वायुशक्ति 646. वायुवेगगा= वायुवेग से चलने वाली 647. यमानुजा= यम के छोटी बहिन 648. संयमनी= संयमनशक्ति अथवा संयमनीपुर 649. संज्ञा= सूर्यप्रिया संज्ञास्वरूपा 650. छाया= संज्ञा की छायाभूता सवर्णा 651. स्फुरद्द्युति:= उद्दीप्त कान्तिवाली 652. रत्नवेदी= रत्नवेदिकारूपा 653. रत्नवृन्दा= रत्नस्मूहरूपा 654. तारा= तारामण्डलरूपा 655. तरणिमण्डला= सूर्यमण्डल स्वरूपा 656. रुचि:= प्रभा 657. शान्ति:= शान्तिरूपा 658. क्षमा= तितिक्षामयी अथवा पृथ्वी 659. शोभा= छविमयी 660. दया= करुणामयी

661. दक्षा= कुशला या चतुर
662. द्युति:=कांतिमयी
663. त्रपा= लज्जा
664. तल्तुष्टि:= ताली बजाने से खुश होने वाली
665. विभा= प्रभा
666. पुष्टि:= पुष्टिरूपा
667. संतुष्टि:=संतोषमयी
668. पुष्टभावना= सुदृढ़ भावना वाली
669. चतुर्भुजा= चार भुजाएँ धारण करने वाली (लक्ष्मी)
670. चारुनेत्रा=सुन्दर नेत्रवाली
671. द्विभुजा= दो बाहुवाली (कालिन्दी या श्री राधा)
672. अष्टभुजा= आठ भुजा वाली (सरस्वती)
673. अबला= बल का प्रदर्शन न करने वाली
674. शङ्खहस्ता= हाथ में शङ्ख धारण करने वाली (वैष्णवी मूर्ती)
675. पद्महस्ता= हाथ में कमल धारण करने वाली (लक्ष्मी)
676. चक्रहस्ता= हाथ में चक्र धारण करने वाली वैष्णवी मूर्ती
677. गदाधरा= गदा धारण करने वाली।
678. निषङ्गधारिणी= तरकस धारण करने वाली
679. चर्मखड्गपाणि:= हाथ में ढाल-तलवार लेने वाली
680. धनुर्धरा= धनुष धारण करने वाली

681. धनुष्टंकारिणी= (दुर्गा के रूप में) धनुष का टंकार करने वाली 682.योद्ध्री= युध्द करने वाली 683.दैत्योद्भटविनाशिनी= दैत्य सेना के उद्भट योध्दाओं का विनाश करने वाली 684.रथस्था= रथ पर बैठने वाली 685.गरुडारूढा= गरुड़पर आरूढ़ होने वाली 686.श्रीकृष्णहृदयस्थिता= कृष्ण के हृदय रूपी सिंहासन पर आसीन 687.वंशीधरा= कृष्ण रूप से वंशी धारण करने वाली 688.कृष्णवेषा= श्री कृष्ण का भेष धारण करने वाली 689.स्रग्विणी= पुष्पों के हारों से अलंकृत 690.वनमालिनी= वनमाला धारण करने वाली 691.किरीटधारिणी= मस्तक पर किरीट धारण करने वाली 692.याना= यानस्वरूपा 693.मन्दमन्दगति:= धीरे-धीरे चलने वाली 694. गति:= सद्गतिस्वरूपा 695.चन्द्रकोटिप्रतीकाशा= कोटिचन्द्रतुल्या 696.तंवी= कृशाङ्गी 697.कोमलविग्रहा= मृदुल शरीर वाली 698.भैष्मी=भीष्मपुत्री रुक्मिणीरूपा 699.भीष्मसुता= राजा भीष्म की पुत्री रुक्मिणी 700.अभीमा=अभयंकर-सौम्यरूप वाली
701.रुक्मिणी= श्री कृष्ण की प्रमुख पटरानी
702.रुकमरूपिणी= सुनहले रूप वाली
703.सत्यभामा= सत्राजित की पुत्री श्री कृष्णप्रिया
704.जाम्बवती=जाम्बवान द्वारा पोषित एवं उन्हीं से प्राप्त दिव्य रूपा पटरानी
705.सत्या= 'सत्या' नाम वाली श्री कृष्ण की पटरानी
706.भद्रा='भद्रा' नाम वाली पटरानी
707.सुदक्षिणा= परम उदारस्वरूपा श्री कृष्ण की पटरानी
708. मित्रविन्दा= 'मित्रविन्दा' नाम वाली पटरानी
709.सखी= राधारानी की सखी
710.वृन्दा= वृन्दावन के अधिदेवी
711.वृन्दारण्यध्वजोर्ध्वगा= वृन्दावन की ध्व्जतुल्या-ऊर्ध्वगामिनी
712.श्रृङ्गारकारिणी= श्रृङ्गार करने वाली
713.श्रृङ्गा= श्रृङ्गस्वरूपा
714.श्रृंङ्गभू:= शिखरभूमि
715. श्रृङ्गदा= शिखर पर स्थान देने वाली
716.खगा=आकाशचारिणी
717.तितिक्षा= क्षमा
718.ईक्षा= ईक्षणस्वरूपा
719.स्मृति:= स्मरण-शक्ति
720.स्पर्धा= स्पर्धारूपा

721.स्पृहा= अभिलाषा
722.श्रद्धा= आस्तिक्य-बुध्दिस्वरूपा
723.स्वनिर्वृत्ति:= निजानन्दास्वरूपा
724.ईशा= ईशनकर्त्री
725.तृष्णा= कामना
726.भिदा= भेदस्वरूपा
727.प्रीति:= प्रेम या प्रसन्नता
728.हिंसा= हिंसावृत्तिरूपा
729.याञ्चा= याचनारूपा
730.क्लमा= क्लान्तिरूपा अथवा अक्लमा-क्लमरहिता
731.कृषि:= कृषि (वार्ता का एक भेद)
732.आशा= आशारूपिणी
733.निद्रा= निद्रा की अधिष्ठात्री या निद्रारूपा
734.योगनिद्रा= योगनिद्रा, जिसका आश्रय लेकर भगवान विष्णु चार मास तक शयन करते हैं
735.योगिनी= योगिनीरूपा
736.योगदा= योगदायिनी
737.युगा= युग-स्वरूपा
738.निष्ठा= परमगति, आश्रयशक्ति अथवा आधारस्वरूपा
739.प्रतिष्ठा= प्रतिष्ठास्वरूपा, आश्रय अथवा अवलम्ब
740.शमिति:= शमन-स्वरूपा

741. सत्त्वप्रकृति:= सर्वगुणमयी प्रकृति वाली
742. उत्तमा= उत्कृष्ट स्वरूपा
743. तम:प्रकृतिदुर्मर्षी= तमोगुणमय स्वभाव को दु:ख से सहन करने वाली
744. रज:प्रकृति:= रजोगुणप्रधान प्रकृतिस्वरूपा
745. आनति:= सब ओर सी नमनशीला
746. क्रिया= क्रियाशक्ति
747. अक्रिया= निष्क्रिय
748. कृति:= प्रयत्नरूपा
749. ग्लानि:= ग्लानिरूपिणी
750. सात्त्विकी= सत्त्व-प्रधाना शक्ति
751. आध्यात्मिकी= आध्यात्मिक शक्ति
752. वृषा= धर्मस्वरूपा
753. सेवा=सेवारूपिणी
754. शिखा= नदियों की शिखाभूता
755. मणि:=मणि-रत्न-स्वरूपा
756. वृध्दि:=अभ्यिदय की हेतुभूता
757. आहूति:=आह्वानस्वरूपा
758. सुमति:= सद्बुद्धिस्वरूपिणी
759. द्यु:=द्युलोकरूपिणी
760. भू:= पृथ्वीस्वरूपा

761. रज्जुद्विदाम्नी= दो तटों वाली 762. षड्वर्गा=षड्वर्गरूपिणी 763. संहिता= वेदरूपिणी 764. सौख्यदायिनी=सर्वसुखदा 765. मुक्ति:=मुक्तिरूपा 766. प्रोक्ति:= श्रेष्ठवाणी रूपा 767. देशभाषा=देशीयभाषा 768. प्रकृति:= प्रकृतिरूपा 769. पिङ्गलोद्भवा=पिङ्गला नाड़ी से उत्पन्न 770. नागभाषा=नागों की भाषा को जानने वाली अथवा नागों से भाषण करने वाली 771. नागभूषा=नागों से भूषित 772. नागरी=नागरी अर्थात् चतुरा 773. नगरी= नगरस्वरूपा 774. नगा=वृक्ष अथवा गिरीरूपा 775. नौ:=ना 776. नौका= नाव 777. भावनौ:=संसार सागर से पार उतारने वाली नौका 778. भाव्या=मन में भावना (ध्यान) करने योग्य 779. भवसागरसेतुता= भव सागर से पार जाने के लिये सेतुरूपा 780. मनोमयी=मन:स्वरूपा

781. दारोमयी=काष्ठ की बनी हुई 782. सैकती= सिकता से पूर्ण 783. सिकतामयी= वालुका से पूर्ण या वालुकामयी 784. लेख्या=चित्रमयी 785. लेप्या= मिट्टी की प्रतिमा 786. मणिमयी= मणिनिर्मित प्रतिमा 787. प्रतिमा हेमनिर्मिता=सोने की बनी प्रतिमा 788. शैली=शिलामयी प्रतिमा 789. शैलभवा=पर्वत से प्रकट प्रतिमा 790. शीला= शीलयुक्ता अथवा शीलस्वरूपा 791. शीकाराभा=जल कणों अथवा जल की फुहारों से शोभित 792. चला=चलस्वरूपा 793. अचल=अचलस्वरूपा 794. अस्थिता= अस्थिर 795. सुस्थिता=सुस्थिर 796. तूली=तूलिका 797. वैदिकी= वेदोक्त पध्दती 798. तांत्रिकी=तांत्रोक्त पध्दति 799. विधि:=विधिवाक्यास्वरूपा 800. संध्या=रात और दिन की संधि वेला

गर्ग संहिता माधुर्य खण्‍ड : अध्याय 19 
801. संध्याभ्रवसना=संध्या-कालिक बादल या आकश की भाँति वस्त्र वाली 802. वेदसंधि:=वेद मंत्रों में संधि (संहिता) स्वरूपा 803. सुधामयी=अमृतमयी 804. सांयतनी=सांय कालिकी शोभा 805. शिखा=ज्वालामयी 806. अवेध्या=अभेदनीया 807. सूक्ष्मा=सूक्ष्मस्वरूपा 808. जीवकला= जीवरूपा 809. कृति:,=कृतिरूपा 810. आत्मभूता=सबकी आत्मस्वरूपा 811. भाविता:=ध्यान या भावना की विषयभूता 812. अण्वी=सूक्ष्मस्वरूपा 813. प्रह्वी= विनयशीला 814. कमलकर्णिका= हृदय कमल की कर्णिका में ध्येया 815. नीरजनी= आरती 816. महाविद्या=तत्त्वसाक्षात्कार कराने वाली महावाक्यबोधात्मिका महाविद्या, अथव ब्रह्मविद्यारूपा महाविद्या 817. कंदली= सुख की अङ्कुरस्वरूपा 818. कार्यसाधनी= भक्त जनों के अभीष्ट कार्य को सिध्द करने वाली 819. पूजा= अर्चना 820. प्रतिष्ठा=स्थापना

821. विपुला=विपुलस्वरूपा 822. पुनन्ती=पवित्र करने वाली 823. पारलौकिकी=परलोक के लिये हितकारिणी 824. शुक्लशुक्ति:=श्वेत सीपी या सितुही की उपलब्धि का स्थान 825. मौक्तिका=मुक्तास्वरूपा 826. प्रतीति:=प्रतीतिस्वरूपा 827. परमेश्वरी=परमेश्वरप्रिया 828. विरजा=निर्मला 829. उष्णिक्=वैदिक-छन्द -विशेष 830. विराड्=विराट्-रूपा 831. वेणी= त्रिवेणीरूपा 832. वेणुका=वंशीरूपिणी 833. वेणुनादिनी=वेणुनाद करने वाली- बाँसुरी की तान छेड़ने वाली 834. आवर्तिनी=भँवरों से युक्ता 835. वार्तिकदा= वार्तिकदायिनी 836. वार्ता=कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य के भेद से त्रिविध वार्ता 837. वृत्ति:=जीविकारूपा 838. विमानगा=विमान पर यात्रा करने वाली 839. रासाढ्या=रासजनित सुख से सम्पन्न 840. रासिनी=रासपरायणा

841. रासा=रासस्वरूपा 842. रासमण्डलवर्तिनी=रासमण्डल में वर्तमान 843. गोपगोपीश्वरी=गोपों तथा गोपङ्गनाओं की आरध्या ईश्वरी 844. गोपी=गोपीरूपा 845. गोपी-गोपाल वन्दिता 846. गोचारिणी=अपने तट पर गोऔं को चरने के लिये स्थान और सुविधा देने वाली 847. गोपनदी=गोपों की नदी 848. गोपानन्दप्रदायिनी=गोपों को आनन्द प्रदान करने वाली 849. पशव्यदा=पशुओं के लिये हितकर घास प्रदान करने वाली 850. गोपसेव्या=गोपों के द्वार सेवनीया 851. कोटिशो गोगणावृता=करोड़ों गौओं के समुदाय से घिरी हुई 852. गोपानुगा=गोपगण जिनका अनुगमन करते हैं या गोप जिनके सेवक हैं, ऐसी 853. गोपवती=गोपों से युक्त 854. गोविन्दपदपादुका=गोविन्द-चरणों की पादुका स्वरूप 855. वृषभानुसुता=वृषभानुनन्दिनी राधा से अभिन्न 856. राधा=श्री कृष्णा की आराध्या राधा-स्वरूपा 857. श्रीकृष्णवशकारिणी=श्री कृष्ण को वश में कर लेने वाली 858. कृष्णप्राणाधिका=श्रीकृष्ण को प्राणों से भी बढ़कर प्रिय 859. शश्वदरसिका=नित्यरसिका 860. रसिकेश्वरी=रसिकों की ईश्वरी

861. अवटोदा=अवटोदा नाम की नदी 862. ताम्रपर्णी=ताम्रपर्णी नाम की नदी 863. कृतमाला=इसी नाम वाली नदी 864. विहायसी=विहायसी नदी 865. कृष्णा=कृष्णा नदी 866. वेणी=वेणी नाम की नदी 867. भीमरथी=भीमा नाम की नदी 868. तापी=तपती नाम की नदी 869. रेवा=नर्मदा 870. महापगा= विशाल नदी, अथवा महानदी नाम की नदी 871. वैयासकी= वैयासकी (व्यास) नदी 872. कावेरी=कावेरी नदी 873. तुङ्गभद्रा=तुङ्गभद्रा नाम की नदी 874. सरस्वती=सरस्वती नदी 875. चन्द्रभागा=चिनाब नदी 876. वेत्रवती=बेतवा नदी 877. ऋषिकुल्या=इसी नाम की नदी 878. ककुद्मिनी=ककुद्मिनी नदी 879. गौमती=गोदावरी 880. कौशिकी=कोसी नदी

881. सिन्धु:=सिन्धु नदी
882. बाण-गङ्गा= अर्जुन के बाण से प्रकट हुई पाताल गङ्गा
883. अतिसिद्धिदा=अत्यंत सिद्ध प्रदान करने वाली
884. गोदावरी=गौमती
885. रत्नमाला=नदी
886. गङ्गा=गङ्गा नदी
887. मन्दाकिनी=आकाश गङ्गा
888. बला=बला नाम की नदी
889. स्वर्णदी=स्वर्ग लोक की नदी गङगा
890. जाह्नवी=जह्नुनन्दिनी गङ्गा
891. वेला=वेला नदी
892. वैष्णवी =विष्णुकुल्या
893. मङ्गलालया=मङ्गल का आवास
894. बाला=बाला नदी
895. विष्णुपदी=गङगा
896. सिन्धुसागरसंगता= गङ्गासागर-संगम-स्वरूपा
897. गङ्गासागरशोभाढ्या=गङ्गा और सागर के संगम की शोभा से सम्पन्न
898. सामुद्री=समुद्रप्रिय
899. रत्नदा=रत्न प्रदान करने वाली
900. धुनी=नदीरूपा

901. भागीरथी=राजा भागीरथ के द्वारा लायी गई गङ्गा 902. स्वर्धुनीभू:=गङ्गा के प्राकट्य की भूमि 903. श्रीवामनपदच्युता= श्री वामन के चरणों से च्युत हुई 904. लक्ष्मी:=लक्ष्मीस्वरूपा 905. रमा=पद्मा 906. रमणीया=रमणीयता से युक्त 907. भार्गवी=भृगुपुत्री 908. विष्णुवल्लभा=भगवान् विष्णु की प्रिया 909. सीता=सीतास्वरूपा 910. अर्चि:=अग्नि ज्वालारूपिणी 911. जानकी=जनक-नन्दिनी 912. माता=जगज्जननी 913. कलङ्क-रहिता=निष्कलङ्का 914. कला=भगवत्कला-स्वरूपा 915. कृष्णपादाब्जसम्भूता=श्री कृष्ण के चरणारविन्दों से प्रकट हुई 916. सर्वा=सर्वस्वरूपा 917. त्रिपथगामिनी=त्रिपथगा गङ्गा 918. धरा=धरणी स्वरूपा 919. विश्वम्भरा=विश्व का भरण पोषण करने वाली 920. अनन्ता=अन्तरहित

921. भूमि:=आधारभूमिस्वरूपा 922. धात्री=धाय 923. क्षमामयी=क्षमास्वरूपा 924. स्थिरा=स्थिरस्वरूपा 925. धरित्री=धारण करने वाली 926. धरणी=लोकधारिणी पृथ्वी 927. उर्वी=भूमि 928. शेषफणस्थिता=शेषनाग के फनों पर रहने वाली 929. अयोध्या=जिसके साथ युध्द न किया जा सके ऐसी अजेय पुरी 930. राघवपुरी=राघवेन्द्र की नगरी 931. कौशिकी=कुशिकवंशजा 932. रघुवंशजा=रघुकुल में उत्पन्न होने वाली 933. मथुरा=मथुरा-नगरी 934. माथुरी=मथुरा-मण्डल में प्रकट 935. पन्था=मार्गस्वरूपा 936. यादवी=यदुवंशियों की नगरी 937. ध्रुवपूजिता=ध्रुव से प्रशंसित 938. मयायु:=मयासुर को आयु प्रदान करने वाली 939. बिल्वनीलोदा=बिल्व के समान नील रंग के जलवाली 940. गङ्गाद्वारविनिर्गता=हरद्वार से निकली हुई
941. कुशावर्तमयी=कुशवर्त नामक तीर्थ स्वरूपा 942. ध्रौव्या=ध्रुवत्व से युक्त 943. ध्रुवमण्डलमध्यगा=ध्रुवमण्डल के बीच से निकली हुई 944. काशी=वाराणसी 945. शिवपुरी=शिवकी नगरी 946. शेषा=शेषस्वरूपा 947. विन्ध्या=विन्ध्यास्वरूपा 948. वाराणसी=काशी 949. शिवा=शिवास्वरूपा 950. अवन्तिका=मालव प्रदेश की राजधानी और महाकाल की नगरी 951. देवपुरी=देवनगरी 952. प्रोज्ज्वला=प्रकृष्ट शोभा से सम्पन्न 953. उज्जयिनी=उज्जैन 954. जिता=जितस्वरूपा 955. द्वारावती=द्वारकापुरी 956. द्वारकामा=द्वार की कामना वाली 957. कुशभूता=कुश के प्रकट होने का स्थान 958. कुशस्थली=कुशों की उत्पत्ति-स्थली द्वारका 959. महापुरी=महानगरी 960. सप्तपुरी=सप्तपुरीस्वरूपा

961.नन्दिग्रामस्थलस्थिता=नन्दिग्राम के स्थल में स्थित सरयू अथवा यमुना 962. शालग्राम-शिलादित्या=शालग्रामशिला की उत्पत्ति का स्थान गण्ड की नदी 963. सम्भलग्राममध्गा=सम्भल ग्राम के मध्य में गयी हुई 964.वंशगोपालिनी=वंशगोपाल मंत्र से युक्त 965.क्षिप्ता=क्षिप्तस्वरूपा 966. हरिमन्दिरवर्तिनी=भगवान् के मन्दिर में विद्यमान 967. बर्हिष्मती=बर्हिष्मती नाम की नगरी 968. हस्तिपुरी=हस्तिनापुर नगरी 969. शक्रप्रस्थनिवासिनी=इन्द्रप्रस्थ (देहली) में निवास करने वाली 970. दाडिमी=दाड़िमफलस्वरूपा 971. सैन्धवी=सिन्धिप्रिया 972. जम्बू:=जम्बूनदीरूपा 973.पौष्करी=पुष्करद्वीप से सम्बन्ध रखने वाली 974.पुष्करप्रसू:=पुष्कर की उत्पत्ति का स्थान 975. उत्पलावर्तगमना=उत्पलावर्त तीर्थ में जाने वाली 976. नैमिषी=नैमिषारण्यवासिनी 977.अनिमिषादृता=देवपूजिता 978.कुरुजाङ्गलभू:=कुरुजाङ्गल देश में प्रकट 979.काली=कृष्णवर्णा अथवा काली गङ्गा 980.हैमवती=हिमालय से उत्पन्न

981.आर्बुदी=आबू में प्रकट
982.बुधा=विदुषी
983.शूकरक्षेत्र-विदिता=शूकर क्षेत्र में प्रसिद्ध
984.श्वेतवाराह-धारिता=श्वेतवाराह के द्वारा धारित
985. सर्वतीर्थमयी=सर्वतीर्थस्वरूपा
986. तीर्था=तीर्थभूता
987.तीर्थानां तीर्थकारिणी=तीर्थों को तीर्थ बनाने वाली
988. हारिणी सर्वदोषानाम्=सब दोषों को हरने वाली
989. दायिनी सर्वसम्पदाम्=सब सम्पत्तियों को देने वाली
990.वर्धिनी तेजसाम्=तेज को बढ़ाने वाली
991.साक्षात्=प्रत्यक्ष प्रकट
992.गर्भवास निकृन्तनी=माता के गर्भ में वास करने के कष्ट का उच्छेद करने वाली
993.गोलोकधाम=गोलोक की प्रकाश रूपा
994.धनिनी=धन से सम्पन्न
995.निकुञ्ज-निजमञ्जरी=निकुञ्ज में अपनी मञ्जरियों के साथ रहने वाली
996.सर्वोत्तमा=सबसे उत्तम
997.सर्वपुण्या=सर्वाधिक पुण्यशालिनी
998. सर्वसौन्दर्यश्रृङ्खला=सम्पूर्ण सुन्दरता को बाँधकर रखने वाली
999. सर्वतीर्थोपरिगता=सब तीर्थों के ऊपर पहुँची हुई
1000. सर्वतीर्थाधिदेवता=सम्पूर्ण तीर्थों की अधिदेवी॥

कालिन्दी के सहस्त्रनाम का वर्णन कीर्ति देने वाला तथा उत्तम कामपूरक है, यह बडे़-बडे़ पापों को हर लेता, पुण्य देता और आयु को बढ़ाने वाला श्रेष्ठ साधन है।

रात में एक बार इसका पाठ कर ले तो चोरों से भय नही होता। 

रास्ते में दो बार इसका पाठ कर लें तो डाकू और लुटेरों से कहीं भय नही होता। 

द्विज को चाहिये कि वह द्वितीया से पूर्णिमा तक प्रतिदिन कालिन्दी देवी का ध्यान करके भक्तिभाव से दस बार इस सहस्त्रनाम का पाठ करे, ऐसा करने से यदि रोगी हो तो रोग से छूट जाता है, कैद में पड़ा हो तो वहाँ के बन्धन से मुक्त हो जाता है, गर्भिणी नारी हो तो वह उत्तम संतान पैदा करती है और विद्यार्थी हो तो वह विद्वान होता है। 

मोहन, स्तम्भन, वशीकरण, उच्चाटन, मारण, शोषण, दीपन, उन्मादन, तापन, निधिदर्शन आदि जो-जो वस्तु मनुष्य मन में चाहता है, उस उसको वह प्राप्त कर लेता है।

इस पाठ से ब्राह्मण ब्रह्मतेज से सम्पन्न होता है, क्षत्रिय पृथ्‍वी का आधिपत्य प्राप्त करता है, वैश्‍य खजाने का मालिक होता है और शूद्र इसको सुनकर निर्मल-शुद्ध हो जाता है। 

जो पूजाकाल में प्रतिदिन भक्तिभाव से इसका पाठ करता है, वह जल से अलिप्त रहने वाले कमल पत्र की भाँति पापों से कभी लिप्त नही होता। 

जो लोग एक वर्ष तक पटल और पद्धति की विधि का पालन करके प्रतिदिन इस सहस्त्रनाम का सौ बार पाठ करते हैं और उसके बाद स्तोत्र और कवच पढ़ते हैं, वे सातों द्वीपों से युक्त पृथ्वी का राज्य प्राप्त कर लेंगे, इसमें संशय नहीं है। 

जो यमुनाजी में भक्तिभाव रखकर निष्काम भाव से इसका पाठ करता है, वह पुण्यात्मा धर्म अर्थ काम इस त्रिवर्ग को पाकर इस जीवन में ही जीवमुक्त हो जाता है। 

जो इस प्रसंग का पाठ करता है, वह निकुंजलीला से ललित, मनोहर तथा कालिन्दी तट के लता-समुदायों सें विलसित वृन्दावन के मत वाले भ्रमरों सें अनुनादित गोलोकधाम में पहुँच जाता है।

श्रीनारदजी कहते हैं:- राजन् , इस प्रकार यमुनाजी का सहस्‍त्रनामस्‍तोत्र सुनकर वीरभूप शिरोमणि मांधाता सौभरिमुनि को नमस्‍कार करके अयोध्‍यापुरी को चले गये।

यह मैंने तुमसे गोपियों के शुभ चरित्र का वर्णन किया, तो महान पापों को हर लेने वाला और पुण्‍यप्रद है; बताओ और क्‍या सुनना चाहते हो? 

इस प्रकार श्रीगर्ग संहिता में माधुर्य खण्‍ड के अन्‍तर्गत श्रीसौभरि और मांधाता के संवाद में ‘यमुना-सहस्‍त्रनाम का वर्णन’ नामक उन्‍नीसवाँ अध्‍याय पूरा हुआ।


श्री यमुना अपरनाम कालिन्दीसहस्रनामस्तोत्रम्

गर्गसंहितातः मान्धातोवाच नाम्नां सहस्रं कृष्णायाः सर्वसिद्धिकरं परम् । वद मां मुनिशार्दूल त्वं सर्वज्ञो निरामयः ॥ १॥ सौभरिरुवाच नाम्नां सहस्रं कालिन्द्या मान्धातस्ते वदाम्यहम् । सर्वसिद्धिकरं दिव्यं श्रीकृष्णवशकारकम् ॥ २॥ विनियोगः ॥ अस्य श्रीकालिन्दीसहस्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य सौभरिरृषिः । श्रीयमुना देवता । अनुष्टुप् छन्दः । मायाबीजमिति कीलकम् । रमाबीजमिति शक्तिः । श्री कालिन्दनन्दिनीप्रसादसिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः । अथ ध्यानम् ॥ ॐ श्यामामम्भोजनेत्रां सघनघनरुचिं रत्नमञ्जीरकूजत् काञ्चीकेयूरयुक्तां कनकमणिमये बिभ्रतीं कुण्डले द्वे । भाजच्छीनीलवस्त्रां स्फुरदमलचलद्धारभारां मनोज्ञां ध्यायेन्मार्तण्डपुत्रीं तनुकिरणचयोद्दीप्तदीपाभिरामाम् ॥ ३॥ ॐ कालिन्दी यमुना कृष्णा कृष्णरूपा सनातनी । कृष्णवामांससम्भूता परमानन्दरूपिणी ॥ ४॥ गोलोकवासिनी श्यामा वृन्दावनविनोदिनी । राधासखी रासलीला रासमण्डलमण्डिता ॥ ५॥ निकुञ्जमाधवीवल्ली रङ्गवल्लीमनोहरा । श्रीरासमण्डलीभूता यूथीभूता हरिप्रिया ॥ ६॥ गोलोकतटिनी दिव्या निकुञ्जतलवासिनी । दीर्घोर्मिवेगगम्भीरा पुष्पपल्लववासिनी ॥ ७॥ घनश्यामा मेघमाला बलाका पद्ममालिनी । परिपूर्णतमा पूर्णा पूर्णब्रह्मप्रिया परा ॥ ८॥ महावेगवती साक्षान्निकुञ्जद्वारनिर्गता । महानदी मन्दगतिर्विरजा वेगभेदिनी ॥ ९॥ अनेकब्रह्माण्डगता ब्रह्मद्रवसमाकुला । गङ्गा मिश्रा निर्जलाभा निर्मला सरितां वरा ॥ १०॥ रत्नबद्धोभयतटा हंसपद्मादिसङ्कुला ।
नदी निर्मलपानीया सर्वब्रह्माण्डपावनी ॥ ११॥

वैकुण्ठपरिखीभूता परिखा पापहारिणी ।
ब्रह्मलोकागता ब्राह्मी स्वर्गा स्वर्गनिवासिनी ॥ १२॥

उल्लसन्ती प्रोत्पतन्ती मेरुमाला महोज्ज्वला ।
श्रीगङ्गाम्भः शिखरिणी गण्डशैलविभेदिनी ॥ १३॥

देशान्पुनन्ती गच्छन्ती महती भूमिमध्यगा ।
मार्तण्डतनुजा पुण्या कलिन्दगिरिनन्दिनी ॥ १४॥

यमस्वसा मन्दहासा सुद्विजा रचिताम्बरा ।
नीलाम्बरा पद्ममुखी चरन्ती चारुदर्शना ॥ १५॥

रम्भोरूः पद्मनयना माधवी प्रमदोत्तमा ।
तपश्चरन्ती सुश्रोणी कूजन्नूपुरमेखला ॥ १६॥

जलस्थिता श्यामलाङ्गी खाण्डवाभा विहारिणी ।
गाण्डीविभाषिणी वन्या श्रीकृष्णाम्बरमिच्छती ॥ १७॥

द्वारकागमना राज्ञी पट्टराज्ञी परङ्गता ।
महाराज्ञी रत्नभूषा गोमतीतीरचारिणी ॥ १८॥

स्वकीया स्वसुखा स्वार्था स्वीयकार्यार्थसाधिनी ।
नवलाङ्गाऽबला मुग्धा वराङ्गा वामलोचना ॥ १९॥

अज्ञातयौवनाऽदीना प्रभा कान्तिर्द्युतिश्छविः ।
सोमाभा परमा कीर्तिः कुशला ज्ञातयौवना ॥ २०॥

नवोढा मध्यगा मध्या प्रौढिः प्रौढा प्रगल्भका ।
धीराऽधीरा धैर्यधरा ज्येष्ठा श्रेष्ठा कुलाङ्गना ॥ २१॥

क्षणप्रभा चञ्चलार्चा विद्युत्सौदामिनी तडित् ।
स्वाधीनपतिका लक्ष्मीः पुष्टा स्वाधीनभर्तृका ॥ २२॥

कलहान्तरिता भीरुरिच्छा प्रोत्कण्ठिताऽऽकुला ।
कशिपुस्था दिव्यशय्या गोविन्दहृतमानसा ॥ २३॥

खण्डिताऽखण्डशोभाढ्या विप्रलब्धाऽभिसारिका ।
विरहार्ता विरहिणी नारी प्रोषितभर्तृका ॥ २४॥

मानिनी मानदा प्राज्ञा मन्दारवनवासिनी ।
झङ्कारिणी झणत्कारी रणन्मञ्जीरनूपुरा ॥ २५॥

मेखला मेखलाकाञ्ची श्रीकाञ्ची काञ्चनामयी ।
कञ्चुकी कञ्चुकमणिः श्रीकण्ठाढ्या महामणिः ॥ २६॥

श्रीहारिणी पद्महारा मुक्ता मुक्ताफलार्चिता ।
रत्नकङ्कणकेयूरा स्फरदङ्गुलिभूषणा ॥ २७॥

दर्पणा दर्पणीभूता दुष्टदर्पविनाशिनी ।
कम्बुग्रीवा कम्बुधरा ग्रैवेयकविराजिता ॥ २८॥

ताटङ्किनी दन्तधरा हेमकुण्डलमण्डिता ।
शिखाभूषा भालपुष्पा नासामौक्तिकशोभिता ॥ २९॥

मणिभूमिगता देवी रैवताद्रिविहारिणी ।
वृन्दावनगता वृन्दा वृन्दारण्यनिवासिनी ॥ ३०॥

वृन्दावनलता माध्वी वृन्दारण्यविभूषणा ।
सौन्दर्यलहरी लक्ष्मीर्मथुरातीर्थवासिनी ॥ ३१॥

विश्रान्तवासिनी काम्या रम्या गोकुलवासिनी ।
रमणस्थलशोभाढ्या महावनमहानदी ॥ ३२॥

प्रणता प्रोन्नता पुष्टा भारती भारतार्चिता ।
तीर्थराजगतिर्गोत्रा गङ्गासागरसङ्गमा ॥ ३३॥

सप्ताब्धिभेदिनी लोला सप्तद्वीपगता बलात् ।
लुठन्ती शैलभिद्यन्ती स्फुरन्ती वेगवत्तरा ॥ ३४॥

काञ्चनी काञ्चनीभूमिः काञ्चनीभूमिभाविता ।
लोकदृष्टिर्लोकलीला लोकालोकाचलार्चिता ॥ ३५॥

शैलोद्गता स्वर्गगता स्वर्गार्च्या स्वर्गपूजिता ।
वृन्दावनवनाध्यक्षा रक्षा कक्षा तटी पटी ॥ ३६॥

असिकुण्डगता कच्छा स्वच्छन्दोच्छलिताद्रिजा ।
कुहरस्था रयप्रस्था प्रस्था शान्तेतरातुरा ॥ ३७॥

अम्बुच्छटा सीकराभा दर्दुरा दर्दुरीधरा ।
पापाङ्कुशा पापसिंही पापद्रुमकुठारिणी ॥ ३८॥

पुण्यसङ्घा पुण्यकीर्तिः पुण्यदा पुण्यवर्धिनी ।
मधोर्वननदीमुख्या तुला तालवनस्थिता ॥ ३९॥

कुमुद्वननदी कुब्जा कुमुदाम्भोजवर्धिनी ।
प्लवरूपा वेगवती सिंहसर्पादिवाहिनी ॥ ४०॥

बहुली बहुदा बह्वी बहुला वनवन्दिता ।
राधाकुण्डकलाराध्या कृष्णाकुण्डजलाश्रिता ॥ ४१॥

ललिताकुण्डगा घण्टा विशाखाकुण्डमण्डिता ।
गोविन्दकुण्डनिलया गोपकुण्डतरङ्गिणी ॥ ४२॥

श्रीगङ्गा मानसीगङ्गा कुसुमाम्बर भाविनी ।
गोवर्धिनी गोधनाढ्या मयूरी वरवर्णिनी ॥ ४३॥

सारसी नीलकण्ठाभा कूजत्कोकिलपोतकी ।
गिरिराजप्रभूर्भूरिरातपत्रातपत्रिणी ॥ ४४॥

गोवर्धनाङ्का गोदन्ती दिव्यौषधिनिधिः श्रुतिः । 
पारदमयी नारदी शारदी भृतिः ॥ ४५॥
श्रीकृष्णचरणाङ्कस्था कामा कामवनाञ्चिता ।
कामाटवी नन्दिनी च नन्दग्राममहीधरा ॥ ४६॥

बृहत्सानुद्युतिः प्रोता नन्दीश्वरसमन्विता ।
काकली कोकिलमयी भाण्डारकुशकौशला ॥ ४७॥

लोहार्गलप्रदाकारा काश्मीरवसनावृता ।
बर्हिषदी शोणपुरी शूरक्षेत्रपुराधिका ॥ ४८॥

नानाभरणशोभाढ्या नानावर्णसमन्विता ।
नानानारीकदम्बाढ्या नानावस्त्रविराजिता ॥ ४९॥

नानालोकगता वीचिर्नानाजलसमन्विता ।
स्त्रीरत्नं रत्ननिलया ललनारत्नरञ्जिनी ॥ ५०॥

रङ्गिणी रङ्गभूमाढ्या रङ्गा रङ्गमहीरुहा ।
राजविद्या राजगुह्या जगत्कीर्तिर्घनापहा ॥ ५१॥

विलोलघण्टा कृष्णाङ्गी कृष्णदेहसमुद्भवा ।
नीलपङ्कजवर्णाभा नीलपङ्कजहारिणी ॥ ५२॥

नीलाभा नीलपद्माढ्या नीलाम्भोरुहवासिनी ।
नागवल्ली नागपुरी नागवल्लीदलार्चिता ॥ ५३॥

ताम्बूलचर्चिता चर्चा मकरन्दमनोहरा ।
सकेसरा केसरिणी केशपाशाभिशोभिता ॥ ५४॥

कज्जलाभा कज्जलाक्ता कज्जलीकलिताञ्जना ।
अलक्तचरणा ताम्रा लालाताम्रकृताम्बरा ॥ ५५॥

सिन्दूरिता लिप्तवाणी सुश्रीः श्रीखण्डमण्डिता ।
पाटीरपङ्कवसना जटामांसीरुचाम्बरा ॥ ५६॥

आगर्य्यगरुगन्धाक्ता तगराश्रितमारुता ।
सुगन्धितैलरुचिरा कुन्तलालिः सुकुन्तला ॥ ५७॥

शकुन्तलाऽपांसुला च पातिव्रत्यपरायणा ।
सूर्यकोटिप्रभा सूर्यकन्या सूर्यसमुद्भवा ॥ ५८॥

कोटिसूर्यप्रतीकाशा सूर्यजा सूर्यनन्दिनी ।
संज्ञा संज्ञासुता स्वेच्छा संज्ञामोदप्रदायिनी ॥ ५९॥

संज्ञापुत्री स्फुरच्छाया तपन्ती तापकारिणी ।
सावर्ण्यानुभवा वेदी वडवा सौख्यप्रदायिनी ॥ ६०॥

शनैश्चरानुजा कीला चन्द्रवंशविवर्धिनी ।
चन्द्रवंशवधूश्चन्द्रा चन्द्रावलिसहायिनी ॥ ६१॥

चन्द्रावती चन्द्रलेखा चन्द्रकान्तानुगांशुका ।
भैरवी पिङ्गलाशङ्की लीलावत्यागरीमयी ॥ ६२॥

धनश्रीर्देवगान्धारी स्वर्मणिर्गुणवर्धिनी ।
व्रजमल्लार्यन्धकरी विचित्रा जयकारिणी ॥ ६३॥   
गान्धारी मञ्जरी टोढी गुर्जर्यासावरी जया ।
कर्णाटी रागिणी गौडी वैराटी गारवाटिका ॥ ६४॥

चतुश्चन्द्रकला हेरी तैलङ्गी विजयावती ।
ताली तालस्वरा गानक्रिया मात्राप्रकाशिनी ॥ ६५॥

वैशाखी चञ्चला चारुर्माचारी घुङ्घटी घटा ।
वैरागरी सोरठी सा कैदारी जलधारिका ॥ ६६॥

कामाकरश्रीकल्याणी गौडकल्याणमिश्रिता ।
रामसञ्जीवनी हेला मन्दारी कामरूपिणी ॥ ६७॥

सारङ्गी मारुती होढा सागरी कामवादिनी ।
वैभासी मङ्गला चान्द्री रासमण्डलमण्डना ॥ ६८॥  
कामधेनुः कामलता कामदा कमनीयका ।
कल्पवृक्षस्थली स्थूला क्षुधा सौधनिवासिनी ॥ ६९॥

गोलोकवासिनी सुभ्रूर्यष्टिभृद्द्वारपालिका ।
श‍ृङ्गारप्रकरा श‍ृङ्गा स्वच्छाक्षय्योपकारिका ॥ ७०॥

पार्षदा सुमुखी सेव्या श्रीवृन्दावनपालिका ।
निकुञ्जभृत्कुञ्जपुञ्जा गुञ्जाभरणभूषिता ॥ ७१॥

निकुञ्जवासिनी प्रेष्या गोवर्धनतटीभवा ।
विशाखा ललिता रामा नीरजा मधुमाधवी ॥ ७२॥  
एकानेकसखी शुक्ला सखीमध्या महामनाः ।
श्रुतिरूपा ऋषिरूपा मैथिलाः कौशलाः स्त्रियः ॥ ७॥

अयोध्यापुरवासिन्यो यज्ञसीताः पुलिन्दकाः ।
रमा वैकुण्ठवासिन्यः श्वेतद्वीपसखीजनाः ॥ ७४॥

ऊर्ध्ववैकुण्ठवासिन्यो दिव्याजितपदाश्रिताः ।
श्रीलोकाचलवासिन्यः श्रीसख्यः सागरोद्भवाः ॥ ७५॥

दिव्या अदिव्या दिव्याङ्गा व्याप्तास्त्रिगुणवृत्तयः ।
भूमिगोप्यो देवनार्यो लता ओषधिवीरुधः ॥ ७६॥

जालन्धर्यः सिन्धुसुताः पृथुबर्हिष्मतीभवाः ।
दिव्याम्बरा अप्सरसः सौतला नागकन्यकाः ॥ ७७॥

परं धाम परं ब्रह्म पौरुषा प्रकृतिः परा ।
तटस्था गुणभूर्गीता गुणागुणमयी गुणा ॥ ७८॥

चिद्घना सदसन्माला दृष्टिर्दृश्या गुणाकरा ।
महत्तत्त्वमहङ्कारो मनो बुद्धिः प्रचेतना ॥ ७९॥

चेतोवृत्तिः स्वान्तरात्मा चतुर्धा चतुरक्षरा ।
चतुर्व्यूहा चतुर्मूर्तिर्व्योम वायुरदो जलम् ॥ ८०॥

मही शब्दो रसो गन्धः स्पर्शो रूपमनेकधा ।
कर्मेन्द्रियं  कर्ममयी ज्ञानं ज्ञानेन्द्रियं द्विधा ॥ ८१॥

त्रिधाधिभूतमध्यात्ममधिदैवमधिस्थितम् ।
ज्ञानशक्तिः क्रियाशक्तिः सर्वदेवाधिदेवता ॥ ८२॥

तत्त्वसङ्घा विराण्मूर्तिर्धारणा धारणामयी ।
श्रुतिः स्मृतिर्वेदमूर्तिः संहिता गर्गसंहिता ॥ ८३॥

पाराशरी सैव सृष्टिः पारहंसी विधातृका ।
याज्ञवल्की भागवती श्रीमद्भागवतार्चिता ॥ ८४॥

रामायणमयी रम्या पुराणपुरुषप्रिया ।
पुराणमूर्तिः पुण्याङ्गी शास्त्रमूर्तिर्महोन्नता ॥ ८५॥

मनीषा धिषणा बुद्धिर्वाणी धीः शेमुषी मतिः ।
गायत्री वेदसावित्री ब्रह्माणी ब्रह्मलक्षणा ॥ ८६॥

दुर्गाऽपर्णा सती सत्या पार्वती चण्डिकाम्बिका ।
आर्या दाक्षायणी दाक्षी दक्षयज्ञविघातिनी ॥ ८७॥

पुलोमजा शचीन्द्राणी वेदी देववरार्पिता ।
वयुनाधारिणी धन्या वायवी वायुवेगगा ॥ ८८॥

यमानुजा संयमनी संज्ञा छाया स्फुरद्द्युतिः ।
रत्नदेवी रत्नवृन्दा तारा तरणिमण्डला ॥ ८९॥

रुचिः शान्तिः क्षमा शोभा दया दक्षा द्युतिस्त्रपा ।
तलतुष्टिर्विभा पुष्टिः सन्तुष्टिः पुष्टभावना ॥ ९०॥

चतुर्भुजा चारुनेत्रा द्विभुजाष्टभुजा बला ।
शङ्खहस्ता पद्महस्ता चक्रहस्ता गदाधरा ॥ ९१॥

निषङ्गधारिणी चर्मखड्गपाणिर्धनुर्धरा ।
धनुष्टङ्कारिणी योद्ध्री दैत्योद्भटविनाशिनी ॥ ९२॥

रथस्था गरुडारूढा श्रीकृष्णहृदयस्थिता ।
वंशीधरा कृष्णवेषा स्रग्विणी वनमालिनी ॥ ९३॥

किरीटधारिणी याना मन्दा मन्दगतिर्गतिः ।
चन्द्रकोटिप्रतीकाशा तन्वी कोमलविग्रहा ॥ ९४॥

भैष्मी भीष्मसुता भीमा रुक्मिणी रुक्मरूपिणी ।
सत्यभामा जाम्बवती सत्या भद्रा सुदक्षिणा ॥ ९५॥

मित्रविन्दा सखीवृन्दा वृन्दारण्यध्वजोर्ध्वगा ।
श‍ृङ्गारकारिणी श‍ृङ्गा श‍ृङ्गभूः श‍ृङ्गदाऽऽशुगा ॥ ९६॥

तितिक्षेक्षा स्मृतिः स्पर्धा स्पृहा श्रद्धा स्वनिर्वृतिः ।
ईशा तृष्णाभिधा प्रीतिर्हिता याञ्चा क्लमा कृषिः ॥ ९७॥

आशा निद्रा योगनिद्रा योगिनी योगदा युगा ।
निष्ठा प्रतिष्ठा समितिः सत्त्वप्रकृतिरुत्तमा ॥ ९८॥

तमःप्रकृतिर्दुर्मर्षा रजःप्रकृतिरानतिः ।
क्रियाऽक्रियाकृतिर्ग्लानिः सात्त्विक्याध्यात्मिकी वृषा ॥ ९९॥

सेवा शिखामणिर्वृद्धिराहूतिः सुमतिर्द्युभूः ।
राज्जुर्द्विदाम्नी षड्वर्गा संहिता सौख्यदायिनी ॥ १००॥

मुक्तिः प्रोक्तिर्देशभाषा प्रकृतिः पिङ्गलोद्भवा ।
नागभावा नागभूषा नागरी नगरी नगा ॥ १०१॥

नौर्नौका भवनौर्भाव्या भवसागरसेतुका ।
मनोमयी दारुमयी सैकती सिकतामयी ॥ १०२॥

लेख्या लेप्या मणिमयी प्रतिमा हेमनिर्मिता ।
शैला शैलभवा शीला शीलारामा चलाऽचला ॥ १०३॥ 
अस्थिता स्वस्थिता तूली वैदिकी तान्त्रिकी विधिः ।
सन्ध्या सन्ध्याभ्रवसना वेदसन्धिः सुधामयी ॥ १०४॥

सायन्तनी शिखावेद्या सूक्ष्मा जीवकला कृतिः ।
आत्मभूता भाविताऽण्वी प्रह्वा कमलकर्णिका ॥ १०५॥

नीराजनी महाविद्या कन्दली कार्यसाधिनी ।
पूजा प्रतिष्ठा विपुला पुनन्ती पारलौकिकी ॥ १०६॥

शुक्लशुक्तिर्मौक्तिका च प्रतीतिः परमेश्वरी ।
विराजोष्णिग्विराड्वेणी वेणुका वेणुनादिनी ॥ १०७॥

आवर्तिनी वार्तिकदा वार्त्ता वृत्तिर्विमानगा ।
सासाढ्यरासिनी सासी रासमण्डलमण्डली ॥ १०८॥

गोपगोपीश्वरी गोपी गोपीगोपालवन्दिता ।
गोचारिणी गोपनदी गोपानन्दप्रदायिनी ॥ १०९॥

पशव्यदा गोपसेव्या कोटिशो गोगणावृता ।
गोपानुगा गोपवती गोविन्दपदपादुका ॥ ११०॥

वृषभानुसुता राधा श्रीकृष्णवशकारिणी ।
कृष्णप्राणाधिका शश्वद्रसिका रसिकेश्वरी ॥ १११॥

अवटोदा ताम्रपर्णी कृतमाला विहायसी ।
कृष्णा वेणी भीमरथी तापी रेवा महापगा ॥ ११२॥

वैयासकी च कावेरी तुङ्गभद्रा सरस्वती ।
चन्द्रभागा वेत्रवती गोविन्दपदपादुका ॥ ११३॥

गोमती कौशिकी सिन्धुर्बाणगङ्गातिसिद्धिदा ।
गोदावरी रत्नमाला गङ्गा मन्दाकिनी बला ॥ ११४॥

स्वर्णदी जाह्नवी वेला वैष्णवी मङ्गलालया ।
बाला विष्णुपदीप्रोक्ता सिन्धुसागरसङ्गता ॥ ११५॥

गङ्गासागर शोभाढ्या सामुद्री रत्नदा धुनी ।
भागीरथी स्वर्धुनी भूः श्रीवामनपदच्युता ॥ ११६॥

लक्ष्मी रमा रामणीया भार्गवी विष्णुवल्लभा ।
सीतार्चिर्जानकी माता कलङ्करहिता कला ॥ ११७॥

कृष्णपादाब्जसम्भूता सर्वा त्रिपथगामिनी ।
धरा विश्वम्भराऽनन्ता भूमिर्धात्री क्षमामयी ॥ ११८॥

स्थिरा धरित्री धरणिरुर्वी शेषफणस्थिता ।
अयोध्या राघवपुरी कौशिकी रघुवंशजा ॥ ११९॥

मथुरा माथुरी पन्था यादवी ध्रुवपूजिता ।
मयायुर्बिल्वनीला द्वार्गङ्गाद्वारविनिर्गता ॥ १२०॥

कुशावर्तमयी ध्रौव्या ध्रुव-मण्डलमध्यगा ।   
काशी शिवपुरी शेषा विन्ध्या वाराणसी शिवा ॥ १२१॥

अवन्तिका देवपुरी प्रोज्ज्वलोज्जयिनी जिता ।
द्वारावती द्वारकामा कुशभूता कुशस्थली ॥ १२२॥

महापुरी सप्तपुरी नन्दिग्रामस्थलस्थिता ।
शास्त्रग्रामशिलादित्या शम्भलग्राममध्यगा ॥ १२३॥

वंशा गोपालिनी क्षिप्रा हरिमन्दिरवर्तिनी ।
बर्हिष्मती हस्तिपुरी शक्रप्रस्थनिवासिनी ॥ १२४॥

दाडिमी सैन्धवी जम्बुः पौष्करी पुष्करप्रसूः ।
उत्पलावर्तगमना नैमिषी निमिषावृता ॥ १२५॥

कुरुजाङ्गलभूः काली हैमावत्यर्बुदा बुधा ।
शूकरक्षेत्रविदिता श्वेतवाराहधारिता ॥ १२६॥

सर्वतीर्थमयी तीर्था तीर्थानां कीर्तिकारिणी ।
हारिणी सर्वदोषाणां दायिनी सर्वसम्पदाम् ॥ १२७॥

वर्धिनी तेजसां साक्षाद्गर्भवासनिकृन्तनी ।
गोलोकधामधनिनी निकुञ्जनिजमञ्जरी ॥ १२८॥

सर्वोत्तमा सर्वपुण्या सर्वसौन्दर्यश‍ृङ्खला ।
सर्वतीर्थोपरिगता सर्वतीर्थाधिदेवता ॥ १२९॥

श्रीदा श्रीशा श्रीनिवासा श्रीनिधिः श्रीविभावना ।
स्वक्षा स्वङ्गा शतानन्दा नन्दा ज्योतिर्गणेश्वरी ॥ १३० ॥

पह्लश्रुति
नाम्नां सहस्रं कालिन्द्याः कीर्तिदं कामदं परम् ।
महापापहरं पुण्यमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥ १३१॥

एकवारं पठेद्रात्रौ चौरेभ्यो न भयं भवेत् ।
द्विवारं प्रपठेन्मार्गे दस्युभ्यो न भयं क्वचित् ॥ १३२॥

द्वितीयां तु समारभ्य पठेत्पूर्णावधिं  द्विजः ।
दशवारमिदं भक्त्या ध्यात्वा देवो कलिन्दजाम् ॥ १३३॥

रोगी रोगात्प्रमुच्येत बद्धो मुच्येत बन्धनात् ।
गुर्विणी जनयेत्पुत्रं विद्यार्थी पण्डितो भवेत् ॥ १३४॥

मोहनं स्तम्भनं शश्वद्वशीकरणमेव च ।
उच्चाटनं पातनं च शोषणं दीपनं तथा ॥ १३५॥

उन्मादनं तापनं च निधिदर्शनमेव च ।
यद्यद्वाञ्छति चित्तेन तत्तत्प्राप्नोति मानवः ॥ १३६॥

ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चस्वी राजन्यो जगतीपतिः ।
वैश्यो निधिपतिर्भूयाच्छूद्रः श्रुत्वा तु निर्मलः ॥ १३७॥

पूजाकाले तु यो नित्यं पठते भक्तिभावतः ।
लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥ १३८॥

शतवारं पठेन्नित्यं वर्षावधिमतः परम् ।
पटलं पद्धतिं कृत्वा स्तवं च कवचं तथा ॥ १३९॥

सप्तद्वीपमहीराज्यं प्राप्नुयान्नात्र संशयः ।
निष्कारणं पठेद्यस्तु यमुनाभक्तिसंयुतः ॥ १४०॥

त्रैवर्ग्यमेत्य सुकृती जीवन्मुक्तो भवेदिह ॥ १४१॥

निकुञ्जलीलाललितं मनोहरं
    कलिन्दजाकूललताकदम्बकम् ।
वृन्दावनोन्मत्तमिलिन्दशब्दितं
    व्रजेत्स गोलोकमिदं पठेच्च यः ॥ १४२॥

॥ इति गर्गसंहितायां श्रीयमुनासहस्रनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Comments

Popular posts from this blog

06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 19 || लीला-सरोवर, हरिमन्दिर, ज्ञानतीर्थ, कृष्‍ण-कुण्‍ड, बलभद्र-सरोवर, दानतीर्थ, गणपति तीर्थ और मायातीर्थ आदि का वर्णन

21.01 *श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन वृत्त*

06. द्वारकाखण्ड || अध्याय 14 || द्वारका क्षेत्र के समुद्र तथा रैवतक पर्वत का माहात्‍म्‍य